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Showing posts from January, 2016

गम, अच्छे हैं..

कभी-कभी गम इतने हसीन होते हैं कि हम उन्हें अपने सीने से लगा लेते हैं..फिर तन्हाइयां अच्छी लगने लगती हैं.. और जी करता है कि आंसुओं में डूबकर अपना वजूद मिटा दें..धीरे-धीरे यही दर्द फितरत बन जाता है..और हमें इंसान से ज्यादा गम से मोहब्बत होने लगती है..लेकिन जनाब, ये तो एक अंधी सुरंग है..इसमें जितना आगे बढ़ते जाओगे उतना ही अंधेरा बढ़ता जाएगा..और ज़िंदगी बेकार चली जाएगी..इसलिए मीठे-मीठे दर्द की बेड़ियों को तोड़ना होगा..इसके बाद भले ही ज़िंदगी पहले जैसी ना रह जाए..लेकिन नई शुरुआत होगी तो उसके बेहतर होने की उम्मीद जगेगी..क्योंकि गम चाहें अपनों से मिले या गैरों से..ये हमें ज़िंदगी जीने की नई राह दिखाते हैं..अपने आपको आजमाने का मौका देते हैं..इसलिए गम, अच्छे हैं..जितना तड़पोगे, उतना निखरोगे..और बेहतर इंसान बनोगे...बस, इन्हें आगे बढ़ने का जरिया बनाते चलो... Anshupriya Prasad

एक पत्नी का प्रेम पत्र

एक खूबसूरत प्रेम कहानी आपके साथ शेयर कर रही हूं... 21 सितंबर, 2015 में ये लव लेटर लीना ने अपने पति अनुज के लिए लिखा...ये पेंटिंग भी लीना ने खुद बनाई है...

We met in 2005 and for the first time I saw a man saying "JAI HIND" and it was little awkward for me and gradually I kept observing you as
a man who never uses foul language and is a tea teetotaler....

Then we got married and I started witnessing

A man respecting woman and loving poor & deprived ...
A man fighting for weakers right without any fear ...
A man who will never compromise no matter how big the benefit is ...
A man who will never harm anyone even if someone is trying to do the same ...
A man who lost nearly everything but still standing tall to contribute for his nation and society ...
A man who was known for his fitness and even after losing his fitness due to injuries he still guides and motivates people to be fit in life ...
A man who can make a dead man alive and active with his motivatio…

बेटी के सिर इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी!!!

पापा तो सो गए !!! चलो, फिर मैं ही गाड़ी चला लेती हूं...

छोटी-छोटी मटकी, छोटे-छोटे हाथ

पनिया भरन को चली अडीबा..

जब किस्मत मेहरबान ना हो

कभी-कभी हमें लाख कोशिशें करने पर भी कुछ नहीं मिलता...सफलता तो दूर की बात...चलने के लिए रास्ता तक नहीं सूझता....हर तरफ़ धक्के...हर बात पर निराशा...छोटी से छोटी चीज के लिए भी तरसना पड़ता है...वहीं कोई ऐसा भी होता है जिसे बिना मांगे सबकुछ मिलता चला जाता है...तो क्या हम उसे किस्मतवाला समझकर और अपने आपको अभागा समझकर हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाएं और अपनी किस्मत को कोसते रहें...नहीं, बिल्कुल नहीं...जब किस्मत मुंह फेर ले और कोई हाथ पकड़ कर आगे बढ़ाने वाला ना मिले तो जीतोड़ मेहनत करें...जो चीज हासिल करनी है उस पर अपना सारा ध्यान लगाएं और अपना दिमाग दूसरों से ज्यादा चलाएं...जब हम पूरा ध्यान लगाकर किसी चीज के बारे में दिन-रात सोचते हैं तो एक दिन वो भी आता है जब नए-नए रास्ते खुलने लगते हैं...वैसे भी अपना रास्ता खुद बनाने का मज़ा ही अलग है...क्योंकि इस ज़िंदगी को भले ही अनगिनत बार जिया जा चुका हो...लेकिन इसे जीने का सबसे बेहतर तरीका खोजना अभी बाकी है...Anshupriya Prasad

'अन्ना के जैसा चश्मा लगा के..'

पापा और मैं सेम टु सेम..ऐसा मुंडन देखा है कहीं..

हंसो कि सारे गम भुला दो..

दूसरे खुशी ना दे तो खुद ही खुश हो लो..कोई और हंसाए नहीं तो खुद ही अपने हंसने का सामान जुटा लो..आए थे अकेले..जाना भी अकेले है..तो खुश रहने के लिए किसी और का मुंह क्यों ताकना..जो अच्छा लगे उस पर मुस्कुरा लो और जो बुरा लगे उसे भी हंस कर टाल दो..दुखी रह कर तो हर इंसान जी लेता है कभी खुश रह कर भी जीना सीखो.. Anshupriya Prasad

'मूंछ नहीं तो कुछ नहीं..'

दूल्हे की मूंछ ना झुकने पाए..आखिर यारों की इज्ज़त का सवाल जो है..

'Hero is little more braver than an ordinary man'

जब लोग जीना मुश्किल कर देते हैं..हसरतें अधूरी रह जाती हैं और सपने टूटने लगते हैं..तब जाकर एक हीरो का जन्म होता है..अगर हमारी सारी इच्छाएं सोचते ही पूरी हो जाएं तो यकीन मानिए इस धरती पर कभी कोई वीर पैदा नहीं होगा..क्योंकि ये बुरा वक्त ही है जो हमारे अंदर के हीरो को जगाता है.. वक्त की मार से जब लोग टूटने लगते हैं और परिस्थितियों के गुलाम बन जाते हैं..हीरो उस वक्त भी डटा रहता है..क्योंकि सहनशक्ति और इरादे ही एक आम इंसान को हीरो बनाते हैं..इसलिए अपनी निराशा, हताशा, गम, परेशानियों से भागो मत.. उन्हें अपनी ताकत बनाओ..बुरे वक्त, बुरे लोगों से सीख लो.. और एक हीरो की तरह अपने सपनों को हकीकत से मिलाने की जंग लड़ते रहो.. Anshupriya Prasad

शादी की तैयारी

लंबी-लंबी चोटी, हाई हील सैंडिल..शादी में जाने को मुक्कू है तैयार..

'Super Hero learns to Fly'

जब कोई बार-बार हमारी कमज़ोरी का मज़ाक उड़ाए..ताने मारे..तिरस्कार करे..और हमारे सपने पर हंसे..उस वक़्त दो रास्ते निकलते हैं..पहला रास्ता..हम हताश होकर अपनी हार मान लें.. और उस परिस्थिति, उस शख़्स से दूर भाग जाएं.. दूसरा रास्ता..अपनी बेइज्ज़ती की आग में जलते हुए मैदान में डटे रहें.. अगर हम पहले रास्ते पर चलेंगे तो वो लोग अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे जो हमें आगे बढ़ता हुआ नहीं देख सकते..और हमें पूरी ज़िन्दगी अपने टूटे हुए सपने का दर्द झेलना पड़ेगा..लेकिन अगर हम दूसरे रास्ते पर चलेंगे और अपने सपने को ही अपनी ज़िंदगी बना लेंगे तो एक दिन वो भी आएगा जब हम सफ़ल होंगे और हमारा तिरस्कार, सम्मान में बदल जाएगा..क्योंकि ये दुनिया कामयाब लोगों को ही सलाम करती है..जंग छोड़कर मैदान से भागने वाले सिपाही की कहीं भी इज्ज़त नहीं होती..इसलिए दुनिया के तानों का बुरा..बेहद बुरा मानो..इतना बुरा मानो कि वो अपमान तब तक दिल से ना निकले जब तक हमें अपनी मंज़िल ना मिल जाए.. Anshupriya Prasad

Joy Express

लंबे सफर के बाद लो आ गया स्टेशन..

मुस्कुराहट का ठेंगा

वो मुस्कुराहट ही क्या जो उदासी को चीरकर ना चमके..वो खिलखिलाहट ही क्या जो सिसकियों के बाद ना गूंजे..जब भी कोई नम आंखों से हंसता है तो उसकी हंसी हमेशा-हमेशा के लिए दिल में उतर जाती है..अगर हम मुस्कुराने के लिए परेशानियों के खत्म होने का इंतज़ार करेंगे तो वो दिन कभी नहीं आएगा..इसलिए आज से, अभी से अपने आंसुओं को पलकों में छुपा लो..दर्द को घोलकर पी जाओ..और बड़ी से बड़ी परेशानी को अपनी मुस्कुराहट का ठेंगा दिखा दो..क्योंकि सुन ले ऐ ज़िंदगी..तेरे हर गम से निपटने के लिए मेरी एक मुस्कान ही काफी है.. Anshupriya Prasad

Human Flower

शरारती फूल..

Dare to Dream

हम सपने कुछ और देखते हैं और हो कुछ और जाता है..जब ज़िंदगी की असलियत सामने आती है तो तगड़ा झटका लगता है..सारी इच्छाएं और सपने अधूरे रह गए लगते हैं..ऐसे में क्या करें..क्या अपनी हार मानकर बैठ जाएं और ज़िंदगी से मुंह फेर लें..नहीं..बिल्कुल नहीं..ऐसी हालत में अपने आपको और तपाएं..अपने अंदर ज़िंदगी की कसौटी पर खरा उतरने की अलख जगाएं..और हां..सपने देखना कभी बंद नहीं करें..क्योंकि सपने और उम्मीद ही हमें ज़िंदा रखते हैं..और ज़िंदा लोगों की बस्ती में मुर्दों का क्या काम..तो अपने दिल के बिखरे हुए टुकड़ों को जोड़ें..दिमाग को रास्ते पर लाएं..और एक वीर योद्धा की तरह नई उम्मीदों और सपनों के साथ ज़िंदगी की जंग जीतने निकल पड़ें..जितनी बार गिरें, उतनी बार दोगुने जोश से आगे बढ़ें..क्योंकि हर हाल में ये ज़िंदगी तो जीनी है..और बिना हारे, बिना रुके जीनी है.. Anshupriya Prasad

'क्योंकि सास भी कभी बहू थी...'

सास, बहू और सेल्फ़ी..

सोलहवां साल मुबारक

मुबारक हो दोस्तों..आखिर वो साल आ ही गया जिसने हम सबको एक बार फिर से सोलह साल का बना दिया..ट्वेंटी-सिक्सटीन(2016) का एक मतलब ये भी है कि जितने भी 20 साल से ज्यादा उम्र के लोग हैं वो अपने आप को 16 साल का महसूस करना शुरू कर दें..ये उम्र का एक ऐसा जादुई साल है जब ना कोई डर होता है और ना ही कोई गम..होते हैं तो बस अनगिनत सपने और फौलादी इरादे..दुनिया को फतह करने के..सोलहवें साल के इसी जोश और जुनून के साथ क्यों ना हम 2016 का हर दिन ऐसे जिएं जैसे ये हमारी ज़िंदगी का पहला और आख़िरी दिन हो..तो इस साल जो करना है कर लो..अपने सपनों को हकीकत में बदलने की रफ्तार तेज कर दो..और अपनी ज़िंदगी को इतनी शिद्दत से जियो कि मैं, आप और हम सब 2016 के हीरो बन जाएं..Anshupriya Prasad