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'Super Hero learns to Fly'


जब कोई बार-बार हमारी कमज़ोरी का मज़ाक उड़ाए..ताने मारे..तिरस्कार करे..और हमारे सपने पर हंसे..उस वक़्त दो रास्ते निकलते हैं..पहला रास्ता..हम हताश होकर अपनी हार मान लें.. और उस परिस्थिति, उस शख़्स से दूर भाग जाएं.. दूसरा रास्ता..अपनी बेइज्ज़ती की आग में जलते हुए मैदान में डटे रहें.. अगर हम पहले रास्ते पर चलेंगे तो वो लोग अपने मकसद में कामयाब हो जाएंगे जो हमें आगे बढ़ता हुआ नहीं देख सकते..और हमें पूरी ज़िन्दगी अपने टूटे हुए सपने का दर्द झेलना पड़ेगा..लेकिन अगर हम दूसरे रास्ते पर चलेंगे और अपने सपने को ही अपनी ज़िंदगी बना लेंगे तो एक दिन वो भी आएगा जब हम सफ़ल होंगे और हमारा तिरस्कार, सम्मान में बदल जाएगा..क्योंकि ये दुनिया कामयाब लोगों को ही सलाम करती है..जंग छोड़कर मैदान से भागने वाले सिपाही की कहीं भी इज्ज़त नहीं होती..इसलिए दुनिया के तानों का बुरा..बेहद बुरा मानो..इतना बुरा मानो कि वो अपमान तब तक दिल से ना निकले जब तक हमें अपनी मंज़िल ना मिल जाए.. Anshupriya Prasad

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दर्द भरा नूर..

मोहब्बत करने वाले रोज़ थोड़ा-थोड़ा मरा करते हैं..क्योंकि किसी और को अपना हिस्सा बनाने के लिए खुद को मिटाना पड़ता है..तभी दूसरे के लिए जगह बनती है..अपना वजूद जितना मिटेगा, उतना ही प्यार बढ़ता चला जाएगा..ज़रूरी नहीं है कि जितनी प्रीत आप कर सकते हो, उतनी वापस भी मिल जाए..क्योंकि प्रेम तो केवल वही निभा सकते हैं जिन्हें दर्द के नूर में तप-तप कर संवरना आता है..प्रेमी अगर मिल जाएं तो 'राधा-कृष्ण'..और ना मिल पाएं तो 'मीरा-कृष्ण'..

खुशियों की तैयारी..

अपने आप से बात करते समय, बेहद सावधानी बरतें..क्योंकि हमारा आगे आने वाला वक्त काफी हद तक, इस बात पर निर्भर करता है कि हम क्या सोचते हैं..या फिर खुद से कैसी बातें करते हैं..हमारे साथ कोई भी बात, होती तो एक बार है, लेकिन हम लगातार उसी के बारे में सोचते रहते हैं..और मन ही मन, उन्ही पलों को, हर समय जीते रहते हैं जिनसे हमें चोट पहुंचती है..बार-बार ऐसी बातों को याद करने से, हमारा दिल इतना छलनी हो जाता है कि सारा आत्मविश्वास, रिस-रिस कर बह जाता है..फिर हमें कोई भी काम करने में डर लगता है..भरोसा ही नहीं होता कि हम कुछ, कर भी पाएंगे या नहीं..तरह-तरह की आशंकाएं सताने लगती हैं..इन सबका नतीजा ये होता है कि अगर कोई अनहोनी, नहीं भी होने वाली होती है, तो वो होने लगती है..गलत बातें सोच-सोच कर, हम अपने ही दुर्भाग्य पर मोहर लगा देते हैं..इसलिए वही सोचो, जो आप भविष्य में होते हुए देखना चाहते हो..वैसे भी न्यौता, सुख को दिया जाता है..दुख को नहीं..तो फिर तैयारी भी खुशियों की ही करनी चाहिए..

गिरने में शरम कैसी?

मेहनत, सफलता की गारंटी नहीं है..संघर्ष, मंज़िल पाने का टिकट नहीं है..बार-बार फेल होगे..बार-बार गिरोगे..हो सकता है कि लक्ष्य भी मिलते-मिलते रह जाए..लेकिन घबराना नहीं..कोशिश करते रहना..क्योंकि मेहनत का कोई और विकल्प नहीं है..सभी कामयाब लोग यही करते हैं..और ज़िंदगी भर करते हैं..पहले तो मंज़िल तक पहुंचने के लिए और फिर उस पर टिके रहने के लिए लगातार मशक्कत करनी पड़ती है..वैसे भी फेल, हमारी प्लानिंग होती है..हम नहीं..इसलिए गिरने से क्या डरना..बढ़े चलो, जब तक है जान..