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एक खूबसूरत प्रेमकहानी जो हकीकत में बदल गई..


'मैं एक लड़की से खूब हंसी-मज़ाक करता था, खूब खुश रहता था, फिर 7 साल बाद उससे मेरी ख़ुशी बर्दाश्त नहीं हुई..और उसने 26 अप्रैल 2016 को मुझे अपना Husband बना लिया..
वो लड़की....मेरी ज़िंदगी...मेरी जान...मेरी पत्नी...कल्पना है...आई लव यू कल्पना...
प्रिय दोस्तों...कहते हैं पहला प्यार मिलता नहीं...मुझे मेरा प्यार मिला है मैने अपने प्यार को पाया है...और पूर्ण रूप से मिला है...शब्द तो नहीं हैं मेरे पास...फिर भी क्या कहूँ...बस ईश्वर...
मांगा है मैने श्याम से, वरदान एक ही
तेरी कृपा बनी रहे, जब तक है ज़िंदगी
दोस्तों आज बताऊं आप को...मेरी शादी लव और अरेंज दोनों ही थी.. दोस्तों...आज बड़ों के सादर चरणस्पर्श...सादर मुझे भी आशीर्वाद चाहिये...क्यों क़ि साक्षात् बड़ों का आशीर्वाद ही स्वयं भगवान है...कि मेरा ये जन्म जन्मों का बंधन जन्मों तक हर जन्म में बंधा रहे...और ईश्वर मुझे हर जन्म में मेरी कल्पना को ही मुझे दे...राधे..राधे..' बल्देव सिंह

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खुशियों की तैयारी..

अपने आप से बात करते समय, बेहद सावधानी बरतें..क्योंकि हमारा आगे आने वाला वक्त काफी हद तक, इस बात पर निर्भर करता है कि हम क्या सोचते हैं..या फिर खुद से कैसी बातें करते हैं..हमारे साथ कोई भी बात, होती तो एक बार है, लेकिन हम लगातार उसी के बारे में सोचते रहते हैं..और मन ही मन, उन्ही पलों को, हर समय जीते रहते हैं जिनसे हमें चोट पहुंचती है..बार-बार ऐसी बातों को याद करने से, हमारा दिल इतना छलनी हो जाता है कि सारा आत्मविश्वास, रिस-रिस कर बह जाता है..फिर हमें कोई भी काम करने में डर लगता है..भरोसा ही नहीं होता कि हम कुछ, कर भी पाएंगे या नहीं..तरह-तरह की आशंकाएं सताने लगती हैं..इन सबका नतीजा ये होता है कि अगर कोई अनहोनी, नहीं भी होने वाली होती है, तो वो होने लगती है..गलत बातें सोच-सोच कर, हम अपने ही दुर्भाग्य पर मोहर लगा देते हैं..इसलिए वही सोचो, जो आप भविष्य में होते हुए देखना चाहते हो..वैसे भी न्यौता, सुख को दिया जाता है..दुख को नहीं..तो फिर तैयारी भी खुशियों की ही करनी चाहिए..

दर्द भरा नूर..

मोहब्बत करने वाले रोज़ थोड़ा-थोड़ा मरा करते हैं..क्योंकि किसी और को अपना हिस्सा बनाने के लिए खुद को मिटाना पड़ता है..तभी दूसरे के लिए जगह बनती है..अपना वजूद जितना मिटेगा, उतना ही प्यार बढ़ता चला जाएगा..ज़रूरी नहीं है कि जितनी प्रीत आप कर सकते हो, उतनी वापस भी मिल जाए..क्योंकि प्रेम तो केवल वही निभा सकते हैं जिन्हें दर्द के नूर में तप-तप कर संवरना आता है..प्रेमी अगर मिल जाएं तो 'राधा-कृष्ण'..और ना मिल पाएं तो 'मीरा-कृष्ण'..

मेरी मां

जब पापा डांटते हैं गलतियों पर...तब प्यार से गले लगाती है माँ.. अपने पेट को काट कर हमें एक रोटी ज्यादा खिलाती वो निस्वार्थ अन्नदात्री है मेरी माँ.. अगर गिर जाऊं कहीं या लड़खड़ा जाऊं अंधेरों में..तो फिर से उंगली पकड़कर मुझे चलना सिखाती है मेरी माँ...