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Shine like never before

We have all the capabilities within us..it's just a matter of realisation and practice..Some people manifest themselves early..some take time..and rest of them never hear their own inner voices..Listen to the whispers of your latent abilities and qualities..It's about time to set them free..Let them flow out of you..World is eagerly waiting for your transformation..So rise above everything which are pulling you down and shine like never before..

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खुद को कितना सताओगे?

अपने आप को चाहें धीरे-धीरे मारो या एक बार में..हमारे अंदर ये जो नन्ही सी जान है..बेचारी, उफ तक नहीं करेगी..यही वजह है कि हम जब चाहें तब अपने आपको दुखी करते रहते हैं..और वो भी चुपचाप सब कुछ सहती रहती है..अगर हमें, खुद से थोड़ा सा भी विरोध करना आता..तो हम ये कभी नहीं कर पाते..हैरत की बात है कि इसकी कोई सजा भी नहीं है..लेकिन सच्चाई तो ये है कि अगर दूसरों को सताना जुर्म है..तो खुद को सताना उससे भी बड़ा जुर्म है..इसलिए खुद के साथ नर्मी से पेश आया करो..और दूसरों को खुश रखने के साथ-साथ अपने आपको भी खुश रखना सीखो.. +anshupriya prasad

Make the Best of it..

अपनी किस्मत से प्यार करना सीखो..फिर चाहें वो अच्छी हो या बुरी..क्योंकि अगर हम अपनी किस्मत को लगातार कोसते रहेंगे..तो वो बद् से बद्तर होती चली जाएगी..लेकिन अगर हम अपनी तकदीर से बिना शर्त बेपनाह मोहब्बत (unconditional Love) करेंगे..तो वो हमसे ज्यादा देर तक रूठी नहीं रह सकती..एक ना एक दिन तो उसे भी पलट कर प्यार करना ही पड़ेगा..इसलिए सबसे पहले जो मिला है और जो हो रहा है..उसे तहे दिल से स्वीकारो..और फिर उसे बेहतर कैसे बनाना है..इस बारे में सोचो..वैसे भी जब तक हम अपने मौजूदा हालात और चीज़ों के लिए शुक्रगुज़ार नहीं होंगे..तब तक बेहतर कल का रास्ता नहीं खुलेगा.. +anshupriya prasad

अगर कोई चिढ़े, ताने मारे या मुंह फेर ले..

अगर कोई हमें पसंद नहीं करता..तो इसका मतलब ये नहीं है कि हमारे अंदर कोई कमी है..और हमें नापसंद करने वाला शख्स कोई बहुत बड़ी तोप है..क्योंकि बहुत सारे लोग तो अपने आप को ही पसंद नहीं करते..वो दूसरों को क्या खाक पसंद करेंगे..इसलिए अगर कोई चिढ़े, ताने मारे या मुंह फेर ले..तो परेशान मत होना..क्योंकि ये उसकी समस्या है, हमारी नहीं..हमें तो खुद ईश्वर ने अपने दिल में जगह दी है..तो फिर बंदों की राय से क्या फर्क पड़ता है.. +anshupriya prasad