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अपने आप से, खुद को कोई कैसे बचाए?



क्या आपने कभी, अपने आपको महसूस किया है..कितना खूबसूरत है वो, जो हमारे अंदर है..बड़ा ही नेकदिल और प्यारा..लेकिन, हम हैं कि दिन-रात इसे सताते रहते हैं..कभी रोकर..कभी चिढ़कर..कभी तनाव (tension) से..तो कभी उल्टी-सीधी बातें बोलकर..

अरे, इतना बुरा तो हम अपने दुश्मन के साथ भी नहीं करते..तो फिर अपने आप को इतनी सजा क्यों देते हैं?..हमें तो पता भी नहीं चलता..लेकिन, जब हम रोते हैं तो हमारे एक-एक आंसू से वो छलनी हो जाता है..जब हम चिंता (worry) करते हैं तो उसका दम घुटता है..और जब हम खुद को कोसते हैं, तो वो सहम कर, मन के किसी कोने में दुबक जाता है..वो क्या करे?..कहां जाए?..अपने आप से, खुद को कोई कैसे बचाए?

हम ही तो हैं, अपने सच्चे साथी..जन्म से लेकर मृत्यु तक..हर दिन, हर पल, हर दुख-सुख में..हमेशा अपने साथ रहने वाले..इसलिए ख्याल रखो अपना..रोना तो बिल्कुल भी नहीं..चिंता (worry) नहीं करना..और गुस्सा भी नहीं करना..जब तक हम खुद, अपने आप से अच्छे से पेश नहीं आएंगे..तब तक दुनिया से कैसे उम्मीद करेंगे कि वो हमारे साथ अच्छा व्यवहार करे?..इसलिए आप जैसे भी हो..अपने आपको पसंद करना सीखो..

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