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A Toast to Happiness

अब वो समय आ गया है जब दर्द के हर रिश्ते को खुशियों में बदल दिया जाए..कोशिश करेंगे तो हो जाएगा..सिर्फ 21 दिनों की ही तो बात है..


It's time to change the bond of pain into the bond of happiness..If I falter, you remind me..If you falter, I'll remind you..Let's challenge  ourselves for next 21 days..and BE HAPPY for life..

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खुशियों की तैयारी..

अपने आप से बात करते समय, बेहद सावधानी बरतें..क्योंकि हमारा आगे आने वाला वक्त काफी हद तक, इस बात पर निर्भर करता है कि हम क्या सोचते हैं..या फिर खुद से कैसी बातें करते हैं..हमारे साथ कोई भी बात, होती तो एक बार है, लेकिन हम लगातार उसी के बारे में सोचते रहते हैं..और मन ही मन, उन्ही पलों को, हर समय जीते रहते हैं जिनसे हमें चोट पहुंचती है..बार-बार ऐसी बातों को याद करने से, हमारा दिल इतना छलनी हो जाता है कि सारा आत्मविश्वास, रिस-रिस कर बह जाता है..फिर हमें कोई भी काम करने में डर लगता है..भरोसा ही नहीं होता कि हम कुछ, कर भी पाएंगे या नहीं..तरह-तरह की आशंकाएं सताने लगती हैं..इन सबका नतीजा ये होता है कि अगर कोई अनहोनी, नहीं भी होने वाली होती है, तो वो होने लगती है..गलत बातें सोच-सोच कर, हम अपने ही दुर्भाग्य पर मोहर लगा देते हैं..इसलिए वही सोचो, जो आप भविष्य में होते हुए देखना चाहते हो..वैसे भी न्यौता, सुख को दिया जाता है..दुख को नहीं..तो फिर तैयारी भी खुशियों की ही करनी चाहिए..

जब किस्मत मेहरबान ना हो

कभी-कभी हमें लाख कोशिशें करने पर भी कुछ नहीं मिलता...सफलता तो दूर की बात...चलने के लिए रास्ता तक नहीं सूझता....हर तरफ़ धक्के...हर बात पर निराशा...छोटी से छोटी चीज के लिए भी तरसना पड़ता है...वहीं कोई ऐसा भी होता है जिसे बिना मांगे सबकुछ मिलता चला जाता है...तो क्या हम उसे किस्मतवाला समझकर और अपने आपको अभागा समझकर हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाएं और अपनी किस्मत को कोसते रहें...नहीं, बिल्कुल नहीं...जब किस्मत मुंह फेर ले और कोई हाथ पकड़ कर आगे बढ़ाने वाला ना मिले तो जीतोड़ मेहनत करें...जो चीज हासिल करनी है उस पर अपना सारा ध्यान लगाएं और अपना दिमाग दूसरों से ज्यादा चलाएं...जब हम पूरा ध्यान लगाकर किसी चीज के बारे में दिन-रात सोचते हैं तो एक दिन वो भी आता है जब नए-नए रास्ते खुलने लगते हैं...वैसे भी अपना रास्ता खुद बनाने का मज़ा ही अलग है...क्योंकि इस ज़िंदगी को भले ही अनगिनत बार जिया जा चुका हो...लेकिन इसे जीने का सबसे बेहतर तरीका खोजना अभी बाकी है... Anshupriya Prasad

दर्द भरा नूर..

मोहब्बत करने वाले रोज़ थोड़ा-थोड़ा मरा करते हैं..क्योंकि किसी और को अपना हिस्सा बनाने के लिए खुद को मिटाना पड़ता है..तभी दूसरे के लिए जगह बनती है..अपना वजूद जितना मिटेगा, उतना ही प्यार बढ़ता चला जाएगा..ज़रूरी नहीं है कि जितनी प्रीत आप कर सकते हो, उतनी वापस भी मिल जाए..क्योंकि प्रेम तो केवल वही निभा सकते हैं जिन्हें दर्द के नूर में तप-तप कर संवरना आता है..प्रेमी अगर मिल जाएं तो 'राधा-कृष्ण'..और ना मिल पाएं तो 'मीरा-कृष्ण'..