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संकल्प से सिद्धि

हम इंतज़ार करते रहते हैं कि थोड़े से हालात सुधर जाएं, तब हम शुरुआत करें..लेकिन हालात कहते हैं कि वो तभी बदलेंगे, जब हम शुरुआत करेंगे..इसी कश्मकश में एक बेहद बेशकीमती चीज़ हमारे हाथ से फिसलती चली जाती है..वो है-समय..

अगर हम ज़िंदगी की गाड़ी को सिर्फ भाग्य के पहियों के भरोसे छोड़ देंगे..तो वो अपनी मर्ज़ी से चलेगी..कभी टेढ़ी-मेढ़ी, तो कभी रुक-रुक कर..लेकिन अगर इस गाड़ी में संकल्प (Resolve) और मेहनत के शक्तिशाली पार्ट (Part) लगा दिए जाएं..तब ये वहीं जाएगी, जहां हम इसे ले जाना चाहते हैं..

हमारा संकल्प, ज़िंदगी की गाड़ी का स्टीयरिंग (Steering wheel) बन जाएगा..जिससे इसे सही दिशा मिलेगी..और हमारी मेहनत, गाड़ी के एक्सीलेटर (Accelerator pedal) का काम करेगी..जिससे इसे रफ्तार मिलेगी..

सही दिशा और रफ्तार..यानी संकल्प और मेहनत..सिर्फ यही दो चीज़ें हैं, जो हमारे लिए छोड़ी गई हैं..और इन्ही दो चीजों का होना या ना होना, हमारी सफलता या असफलता, निर्धारित करता है..

इसलिए, जो भी करना चाहते हो, उसका संकल्प लेकर, जहां हो..जैसे हो..वहीं से शुरू करो..क्योंकि, जब तक हम पूरी लगन से आगे नहीं बढ़ेंगे..तब तक ना तो हालात बदलेंगे..और ना ही लोग..

 

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हिम्मत रखेंगे तो हो जाएगा, असंभव नहीं है..

 जब ज़िंदगी उलटी दिशा में बहे..तो अड़ जाना, दोगुना जोश जगाना..जब सब कुछ बिगड़ता दिखाई दे तो अपने आप पर और अपने ईश्वर (Divine Energy) पर भरोसा, और बढ़ाना..क्योंकि जिस वक्त हम हिम्मत हारते हैं ना..उसी समय हमें सबसे ज्यादा हिम्मत रखने की आवश्यकता (Need) होती है.. आसान वक्त तो अपने आप ही कट जाता है..लेकिन मुश्किल समय में हमें ज़्यादा उम्मीद, ज़्यादा लगन और ज़्यादा विश्वास की ज़रूरत पड़ती है...यही वो समय है जब हमें ज़िद करनी है..अपना शौर्य, अपना दम-खम साबित करना है..अपने अंदर इतना विश्वास (Faith) जगाना है कि हमारे रोम-रोम को इस बात का यकीन हो जाए कि हमारे साथ जो भी होगा वो अच्छा ही होगा..ऐसा करने से ना सिर्फ हमारा मन शांत रहेगा बल्कि भविष्य को लेकर सारे डर भी खत्म हो जाएंगे..फिर हम जिस तरफ भी कोशिश करेंगे उसका नतीजा अच्छा ही होगा.. जब हम आज के  हालात से निपटना सीख लेंगे, उसमें खरे उतरेंगे..तभी तो एक बेहतर दुनिया के दरवाजे खुलेंगे..

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मोहब्बत करने वाले रोज़ थोड़ा-थोड़ा मरा करते हैं..क्योंकि किसी और को अपना हिस्सा बनाने के लिए खुद को मिटाना पड़ता है..तभी दूसरे के लिए जगह बनती है..अपना वजूद जितना मिटेगा, उतना ही प्यार बढ़ता चला जाएगा..ज़रूरी नहीं है कि जितनी प्रीत आप कर सकते हो, उतनी वापस भी मिल जाए..क्योंकि प्रेम तो केवल वही निभा सकते हैं जिन्हें दर्द के नूर में तप-तप कर संवरना आता है..प्रेमी अगर मिल जाएं तो 'राधा-कृष्ण'..और ना मिल पाएं तो 'मीरा-कृष्ण'..

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हम सब अपनी-अपनी कहानी के हीरो हैं..जैसे सुपर हीरो की फिल्में होती हैं न? ठीक वैसे ही, हम भी अपनों के लिए मुसीबतों से जूझते रहते हैं..उनके चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए बड़ी से बड़ी परेशानी मोल लेते हैं.. जिस तरह से फिल्म में हीरो को तरह-तरह की मुसीबतों से घेरा जाता है..उसे, उसकी क्षमता से ज्यादा परेशानियां दी जाती हैं..वैसे ही, हमारी ज़िंदगी भी मुसीबतों और परेशानियों से भरी हुई है..एक समस्या हल करते हैं तो दूसरी खड़ी हो जाती है..एक दुख से निकलते हैं तो दूसरा  पकड़ लेता है..और जब सब कुछ ठीक होने ही वाला होता है तो, विलेन की एंट्री (Entry) हो जाती है..या फिर नई चुनौती खड़ी हो जाती है.. लेकिन, इस सबके बावजूद, ज़िंदगी, बहुत खूबसूरत है..क्योंकि ये हमारी, अपनी कहानी है..सबसे अलग, सबसे प्यारी और सबसे रोमांचक..ये एक ऐसी अद्भुत (Marvellous) फिल्म है..जिसे अगर बड़े पर्दे पर रिलीज़ किया जाए..तो अब तक की सबसे हिट फिल्म साबित होगी..क्योंकि, इतना संघर्ष..इतनी हसरतें..इतने इमोशन (Emotion)..और कहां देखने को मिलेंगे?  इसलिए, अपनी ज़िंदगी की चुनौतियों का सामना एक सुपर स्टार की तरह करें..एक हीरो की तरह ये