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ये दर्द जो सीने को छीले जाता है.. .


जिस समय हम सबसे ज़्यादा कमज़ोर पड़ते हैं न..वही हमारी ज़िंदगी का सबसे ताकतवर पल होता है..क्योंकि उसके बाद खोने के लिए कुछ नहीं बचता..और हमारे अंदर चट्टान की तरह हर तूफान से टकराने का हौसला आ जाता है..

जब हमें लगता है कि अब सब कुछ खत्म हो गया..तब हमारी ज़िंदगी को एक अलग दिशा मिलती है..क्योंकि घनघोर निराशा के बाद ही नई आशा का सृजन (Creation) होता है..

ये दर्द जो सीने को छीले जाता है..वही तो मोहब्बत बनकर आंखों से छलक जाता है..

जब मन में स्याह अंधेरे गहराते हैं..तभी तो हिम्मत जैसा कुछ कौंध जाता है..

ठहरे हैं..हारे नहीं..फिर लौटेंगे..पूरी ताकत के साथ..खफा-खफा सी ज़िंदगी को गले लगाने के लिए..

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खुशियों की तैयारी..

अपने आप से बात करते समय, बेहद सावधानी बरतें..क्योंकि हमारा आगे आने वाला वक्त काफी हद तक, इस बात पर निर्भर करता है कि हम क्या सोचते हैं..या फिर खुद से कैसी बातें करते हैं..हमारे साथ कोई भी बात, होती तो एक बार है, लेकिन हम लगातार उसी के बारे में सोचते रहते हैं..और मन ही मन, उन्ही पलों को, हर समय जीते रहते हैं जिनसे हमें चोट पहुंचती है..बार-बार ऐसी बातों को याद करने से, हमारा दिल इतना छलनी हो जाता है कि सारा आत्मविश्वास, रिस-रिस कर बह जाता है..फिर हमें कोई भी काम करने में डर लगता है..भरोसा ही नहीं होता कि हम कुछ, कर भी पाएंगे या नहीं..तरह-तरह की आशंकाएं सताने लगती हैं..इन सबका नतीजा ये होता है कि अगर कोई अनहोनी, नहीं भी होने वाली होती है, तो वो होने लगती है..गलत बातें सोच-सोच कर, हम अपने ही दुर्भाग्य पर मोहर लगा देते हैं..इसलिए वही सोचो, जो आप भविष्य में होते हुए देखना चाहते हो..वैसे भी न्यौता, सुख को दिया जाता है..दुख को नहीं..तो फिर तैयारी भी खुशियों की ही करनी चाहिए..

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