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Love Anyway

प्यार करने वाले थोड़ा-थोड़ा, रोज़ मरा करते हैं..क्योंकि किसी और को अपना हिस्सा बनाने के लिए, खुद को मिटाना पड़ता है..तभी दूसरे के लिए जगह बनती है..जैसे-जैसे 'मैं' खत्म होता है..वैसे-वैसे मोहब्बत, बढ़ती चली जाती है..इश्क करने वाले जानते हैं कि इस दौलत को ना तो कोई छीन सकता है और ना ही कम कर सकता है..प्रेमी अगर मिल जाएं तो राधा-कृष्ण और ना मिल पाएं तो मीरा-कृष्ण.. +anshupriya prasad
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Self Pity is addictive

मक्खन की तरह सारा वक्त कट जाए..ऐसी ज़िंदगी, किसी की भी नहीं होती..हर शख्स को अपने-अपने हिस्से के संघर्ष का सामना करना पड़ता है..और हमें लगता है कि सिर्फ हम ही मुसीबतों से जूझ रहे हैं..सहते-सहते, अपना दुख बढ़कर इतना बड़ा हो जाता है कि उसके सिवा कुछ भी दिखाई नहीं देता..उससे निपटने का तरीका भी सामने होता है लेकिन हम सेल्फ पिटी (Self Pity) में इतना डूबे रहते हैं कि उस पर नज़र ही नहीं जाती..सहानुभूति, दूसरों से रखना अच्छी बात है..लेकिन खुद पर तरस खाने से कुछ हासिल नहीं होगा..इसलिए ज़िंदगी में भले ही चाहें जैसी कमी रहे..अपने आपको इतना मजबूत बनाओ..कि ना तो खुद को अपने ऊपर तरस आए..और ना ही किसी और को.. +anshupriya prasad

गमों की फैक्ट्री

गम तो एक तरह की फैक्ट्री है..जहां इंसानों को तराशा जाता है..क्योंकि जब तक हमारी सहनशक्ति की बार-बार परीक्षा नहीं ली जाएगी..तब तक कभी ना रुकने, कभी ना हार मानने का हौसला कहां से आएगा..और जब तक खुद नहीं रोएंगे..तब तक दूसरों की तकलीफ कैसे समझ में आएगी..ये जितने भी छोटे-बड़े दुख, दर्द, मुसीबतें और परेशानियां हैं ना..ये कोई सजा नहीं हैं..बल्कि मजबूत और बेहतर इंसान बनने की कड़ियां हैं..इसलिए कुढ़-कुढ़ कर अपने दिमाग, शरीर और इमोशन की ताकत को जाया ना करो..इन कड़ियों को जोड़ो और कीचड़ में भी कमल बनकर खिलो..आसान ज़िंदगी चाहिए तो इंसान बनने का क्या फायदा..पशु-पक्षी बनकर ही जी लेते.. +anshupriya prasad

Only Love, No Pain..

अपनी ही आंखों में जब, किसी और का अक्स नज़र आए..और कदम-कदम पर सैकड़ों टन जादू बिखरने लगे..तो अपनी चाहत के इन पलों को हमेशा-हमेशा के लिए अपने दिल में कैद कर लो..क्योंकि दर्द, प्रेम में नहीं..प्रेम के ना होने में है..और जब दिल, मोहब्बत से लबालब भरा रहेगा..तो इबादत (Oneness) का रास्ता खुद-ब-खुद रोशन हो जाएगा.. +anshupriya prasad

Why don't we Succeed?

हमारी ख्वाहिशें इसलिए पूरी नहीं होतीं क्योंकि, हम अगर एक कदम आगे बढ़ाते हैं तो चार कदम पीछे खींच लेते हैं..एक पल में इरादा करते हैं और दूसरे ही पल ये सोचने लगते हैं कि ये कैसे होगा..ये तो बहुत मुश्किल है..हमारी किस्मत तो इतनी अच्छी नहीं है कि हमें ये मिल जाए..या फिर अरे, छोड़ो क्या करना है..आज तक कुछ मिला भी है जो आगे मिलेगा..इसी उधेड़बुन में हम लगातार पीछे और पीछे होते चले जाते हैं..ऐसे हालात में कितना भी मेहनत कर लो..कितना भी इरादा कर लो..कामयाबी नहीं मिलेगी..क्योंकि हम जितना आगे बढ़ते हैं उससे ज्यादा अपने आपको पीछे धकेल देते हैं..और जब कदम आगे ही नहीं बढ़ेंगे तो मंजिल तक कैसे पहुंचेगे..इसलिए अगर सचमुच कुछ पाना चाहते हो तो सारे किंतु-परंतु छोड़ दो..हमारा काम है अपने इरादे पर टिके रहना..और सही दिशा में मेहनत करना..वो कब होगा..कैसे होगा..ये सोचना हमारा काम नहीं है..कुछ चीजें समय पर भी छोड़ देनी चाहिए..+anshupriya prasad

Make the Best of it..

अपनी किस्मत से प्यार करना सीखो..फिर चाहें वो अच्छी हो या बुरी..क्योंकि अगर हम अपनी किस्मत को लगातार कोसते रहेंगे..तो वो बद् से बद्तर होती चली जाएगी..लेकिन अगर हम अपनी तकदीर से बिना शर्त बेपनाह मोहब्बत (unconditional Love) करेंगे..तो वो हमसे ज्यादा देर तक रूठी नहीं रह सकती..एक ना एक दिन तो उसे भी पलट कर प्यार करना ही पड़ेगा..इसलिए सबसे पहले जो मिला है और जो हो रहा है..उसे तहे दिल से स्वीकारो..और फिर उसे बेहतर कैसे बनाना है..इस बारे में सोचो..वैसे भी जब तक हम अपने मौजूदा हालात और चीज़ों के लिए शुक्रगुज़ार नहीं होंगे..तब तक बेहतर कल का रास्ता नहीं खुलेगा.. +anshupriya prasad

डांस के महासंग्राम में नाज़ुक सी दिव्यांका

नच बलिए जीतना आसान नहीं था..दिव्यांका त्रिपाठी के हर हफ्ते कोई ना कोई इंजरी हो जाती..स्लिप डिस्क, लिगमेंट टियर, बैक स्पैस्म, फ्रैक्चर, एंकल ट्विस्ट..और ना जाने क्या-क्या..दिव्यांका फिट थीं लेकिन उस लेवल की नहीं जिस लेवल की उनसे उम्मीद की जा रही थी..मुकाबला टफ था..डांस के महासंग्राम में फंस गईं थी नाज़ुक सी दिव्यांका..पहली ही पारी में आउट हो गईं..बैक की इंजरी ने दिव्यांका को पस्त कर दिया..लेकिन उन्होने हार नहीं मानी..उनके पति विवेक दहिया के बाद उन्हे सबसे ज्यादा सपोर्ट किया उनकी फिज़ियोथेरेपिस्ट फरनाज़ ने..फ़रनाज़ के भरोसे ने दिव्यांका को ऐसी हिम्मत दी कि चोटिल होने के बावजूद दिव्यांका डटी रहीं..और नच के मुकाबले में जान लगा दी..नतीजा सबके सामने है..उन्हे मिली है नच बलिए-8 की ट्रॉफी..और 9 किलो वजन कम होने का बोनस..इसे कहते हैं आम के आम और गुठलियों के दाम.. +anshupriya prasad
(दिव्यांका त्रिपाठी ये हैं मोहब्बतें सीरियल में डॉ इशिता भल्ला का किरदार निभाती हैं..)