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Showing posts from April, 2016

घरौंदा

मन करता है, कई बार   एक घरौंदा बनाया जाए...
जिसमें तुम्हारे जज़्बात की मिट्टी हो और मेरे अहसास का गारा हो ....
एक कोना मैं सजाऊं ...एक कोना तुम सजाओ...
एक हिस्सा मैं बसाऊं...एक हिस्सा तुम बसाओ ...


और सुनो, तुम्हारे जानिब, एक नया सूरज हो... मेरे जानिब एक पुराना चांद हो ....
कई बार मैं ये भी सोचती हूं कि तुम दबे पांव, उस घर में आना और साथ में थोड़ी उम्मीदों की आग भी ले आना


और मैं, दिलासों से चूल्हा फूंकूंगी.. फिर मिल कर वादों की कुछ छौंक लगाएंगें....
रात के खाने में जब होंठ जलेगा...तो प्यार के शीतल अहसास से एक दूसरे को ठंडक पहुंचाएंगे ..


और जब नींद की बिस्तर लग जाएगी..
तो एक हिस्से में, मैं सो जाऊंगी ...एक हिस्से में तुम सो जाना ....

ज़रीन की कलम से

दिल ये ज़िद्दी है..

जितना संघर्ष, उतना ही मुस्कुराने की ज़िद...जितने गम, उतना ही खिलखिलाने की ज़िद...हां, ज़िद्दी हूं मैं और ज़िंदा भी..खुश रहने के लिए इससे बड़ी वजह हो भी नहीं सकती... +anshupriya prasad

Most useful Beauty Tip

अच्छा दिखने के लिए चेहरे पर मुस्कुराहट की ज़रूरत होती है, सुंदरता की नहीं..जब इंसान दिल से खुश होता है तो उसका चेहरा खिल जाता है और अंग-अंग दमकने लगता है..ऐसे में मेकअप और गहनों की ज़रूरत नहीं रह जाती..लड़का हो या लड़की, मुस्कुराहट एक ऐसी सजावट है जो बदसूरत से बदसूरत इंसान को भी दिलकश बना देती है..तभी तो फोटो खिंचवाते समय हम सब मुस्कुराते हैं, दुखी नहीं होते..तो क्यों ना मुस्कुराहट भरे पलों को ज़िंदगी भर के लिए सहेज लें..दिल से मुस्कुराएं और हमेशा खूबसूरत दिखें.. +anshupriya prasad

ये लम्हा कहीं खो ना जाए..

ज़िंदगी आ रहा हूं मैं..

टशन में..

समंदर में छींटे उड़ाती हुई सहेलियां..

एक दिन सूरज, हमारे आसमान में भी चमकेगा..

अभी तक जो होना था वो हुआ लेकिन अब होगा वही, जो मैं चाहती हूं..क्योंकि किसी की बददुआओं में उतना असर नहीं जितना मेरी दुआओं में है..इसलिए ए दिल, तू डर मत..जी भर के सपने देख..वैसे भी सपने तो कभी भेदभाव नहीं करते तो फिर हम उन्हे किसी और के लिए क्यों छोड़ देते हैं..अगर किसी सपने ने हमारी पलकों पर दस्तक दी है तो वो हमारे लिए ही बना है..बस, दिल में उसे साकार करने का हौसला और धीरज रखो..ये जो सूरज है ना, पूरी दुनिया को जो जगमगाता है..एक दिन हमारे आसमान में भी चमकेगा..और उस दिन हमें ये अहसास होगा कि सब कुछ कितना आसान था..हम बेकार ही डर-डर के जी रहे थे.. Anshupriya Prasad