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Showing posts from June, 2016

धर्म

कभी राम के चरित्र पर उंगली..तो कभी कान्हा के..कभी शिवलिंग पर सवाल तो कभी माता की शक्ति पर..दूसरों की छोड़िए यहां तो लोग अपने ही धर्म का मज़ाक बनाने लगे हैं..हम ये भूल गए हैं कि हमारे भगवान मानव रूप में ज़रूर हैं लेकिन वो मानव नहीं हैं..भगवान की मानवीय साज-सज्जा, उनके काम और यहां तक कि उनके रंगों के पीछे भी अलग-अलग और गहरे मतलब छुपे हुए हैं..वैसे भी सिर्फ मंदिर जाना और पूजा करना ही धर्म नहीं है..हिन्दू धर्म एक जीवन शैली है..इसलिए इसका दूसरे धर्मों से कोई बैर नहीं..हम सबके साथ मिल जुलकर भी अपने धर्म का पालन कर सकते हैं..ज़रूरी नहीं है कि जो चीज़ें हम बचपन से देखते आए हैं वही सही हों..अगर कुछ लोगों ने अपने फायदे के लिए हिन्दू धर्म का स्वरूप बिगाड़ दिया है तो ये ज़िम्मेदारी हमारी है कि हम अपने धर्म के असली रूप को पहचानें और उसे सही मायने में अपनाएं.. +anshupriya prasad

स्टाइल में रहने का..

गर्मी का कूल-कूल स्टाइल

एक खूबसूरत प्रेमकहानी जो हकीकत में बदल गई..

'मैं एक लड़की से खूब हंसी-मज़ाक करता था, खूब खुश रहता था, फिर 7 साल बाद उससे मेरी ख़ुशी बर्दाश्त नहीं हुई..और उसने 26 अप्रैल 2016 को मुझे अपना Husband बना लिया..
वो लड़की....मेरी ज़िंदगी...मेरी जान...मेरी पत्नी...कल्पना है...आई लव यू कल्पना...
प्रिय दोस्तों...कहते हैं पहला प्यार मिलता नहीं...मुझे मेरा प्यार मिला है मैने अपने प्यार को पाया है...और पूर्ण रूप से मिला है...शब्द तो नहीं हैं मेरे पास...फिर भी क्या कहूँ...बस ईश्वर...
मांगा है मैने श्याम से, वरदान एक ही
तेरी कृपा बनी रहे, जब तक है ज़िंदगी
दोस्तों आज बताऊं आप को...मेरी शादी लव और अरेंज दोनों ही थी.. दोस्तों...आज बड़ों के सादर चरणस्पर्श...सादर मुझे भी आशीर्वाद चाहिये...क्यों क़ि साक्षात् बड़ों का आशीर्वाद ही स्वयं भगवान है...कि मेरा ये जन्म जन्मों का बंधन जन्मों तक हर जन्म में बंधा रहे...और ईश्वर मुझे हर जन्म में मेरी कल्पना को ही मुझे दे...राधे..राधे..' बल्देव सिंह

मंज़िलें बुला रही हैं..

जो किस्मत से स्टार नहीं होता..वो मेहनत से बनता है..क्योंकि जब मंज़िलें बुलाती हैं तो रास्ते खुद बनाने पड़ते हैं..अपने लक्ष्य को दिल और दिमाग में ऐसे बसा लो कि खुद मंज़िल तड़प कर कह उठे कि 'अब आ भी जा..कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूं'.. +anshupriya prasad

नन्ही परी

चोरी-चोरी ताके बिटिया रानी

ये आंसू कभी ना छलकें..

आंख में आंसू तभी अच्छे लगते हैं जब उन्हें अपनी पलकों में समेटने वाला सामने हो..अगर आपकी ज़िंदगी में ऐसा शख़्स नहीं है..तो कभी रोना नहीं..क्योंकि उन आंसुओं के छलकने का फ़ायदा ही क्या..जिनकी कोई कीमत ना हो.. +anshupriya prasad

आम रसीले आम..

मीठे-मीठे आम खाकर गुनगुन की आंखें चमक जाएं..

जहां चाह, वहां राह

बाल छोटे हैं तो क्या हुआ..ननद की शादी में जूड़ा तो बन ही सकता है..