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Showing posts from 2017

Either do it or don't crib

When self pity creeps in..we tend to bosom it..It comforts and converts us into passive beings..The more it hurts, the more we cling to it..Emerging from heartfelt emotion is not easy..It takes a lot of persistence to break the mould..Be stubborn and take over the reins..When we are not in charge, things keep on happening at their own- implying law of attraction..But when we choose to be on the right track..Things are ought to move in desired direction..So head out determinedly and produce efficacious results..

Keep Striving

Either fate reigns or I reign..
When we were born, the world was latent to us..we didn't know where have we landed..what type of people we would involve with..or what kind of circumstances we would be into..but now when we are aware, we can create a better world by choosing perseverance over fate..If we don't push ourselves, nothing would change..Inevitably, we would be stuck in a rut..Thus go through the labour pains through consciously changing thoughts and reactions..Take a new birth..and start afresh as an enlightened newborn baby..

Inspire and get inspired

If we live loose then we are bound to lose from a person who is focused and meticulously moving ahead..We enter unarmoured in a battle..yet complain- why only me?.. Whether we sulk, sob or seethe..No emotional upheaval can change the result..The only thing which can escalate our chances of winning is 'Preparation'.. So prepare yourself emotionally, mentally and physically..Cautiously observe and reason out where are you lacking or making mistakes..The moment you start working on your weaknesses, you would be more self assured than ever..As far as learning is concerned, there are a hell of a lot of people all around the world to motivate..Choose your inspiration and inspire with your own success..

Waiting for a dream job?

Every job can be turned into a dream job..provided you do it sincerely and happily..If you wait for the best opportunity, then the wait would be eternal..Because there is no best time..Good or bad times are only our own mind games..If somebody is hellbent on soaring..nothing can plummet him or her..You have to start from wherever you are, whatever the situation is..This is your battlefield..and you have been provided with certain tasks and circumstances..When you prove that you deserve better than what you have got..Then only the next level starts..A better window opens..

Born Different

It's perfectly all right to be naive and ordinary in an aggressive and ostentatious world..because everybody cannot be an assertive go getter..Everyone does things at his or her own pace..and that certainly doesn't make anyone superior or inferior. If people are surpassing you or brushing you off.. Don't consider..It's just a passing phase..In any case no other person can decide your worth, it comes from within..Always remember that no one is born with skills..Keen aspirants can learn and achieve anything..

Deserve better people

There's good and bad in everyone..It depends on us which side we bump into..Therefore so much insistence on changing oneself..So consolidate positive thoughts and determine reciprocal actions..

Live life the way it should be

Either get what you want from life or live the way it should be. Who knows that in the self process improvement, innermost yearnings of the heart would be fulfilled.

Nothing can deny..

All the bruises and pain lead to goodness of life. Because suffering comes with the craving for well-being.

Miracle Brain

To unleash the Mind Power, conceive an aspiration and leave rest to the self-start mechanism of the brain. In no time it will begin facilitating everything required. The onus is on you to manifest endurance and not to change the direction of your thoughts. It can bring forth anything desired. +anshupriya prasad

'Inconvenient Truth'

Inconveniences are high-yielding, if you are willing to bring about changes close to your heart. So enjoy perseverance till you succeed. +anshupriya prasad

'What's in those eyes'

Your eyes are reservoir of what I have been longing all my life. Parting is like a sacrilege. +anshupriya prasad

See your own beauty

Innumerous beauties all around but only few are considered beautiful. You may not find them the most beautiful people in the world. But ironically, they are considered so. Why?..Because beauty is not about the skin or the the shape of the body. Surprisingly, It's got nothing to do with the outer self. Beauty is always inside out. When you have enormous confidence in yourself then you can change the world around you. And Yes, with ordinary looks or body, you yourself can be the most beautiful person. There are ways to it. There are tools and technologies to transform you. But first of all you must have strong will and unabated confidence in yourself. Once you see your own beauty, everyone else would see it too..  +anshupriya prasad

Love Anyway

प्यार करने वाले थोड़ा-थोड़ा, रोज़ मरा करते हैं..क्योंकि किसी और को अपना हिस्सा बनाने के लिए, खुद को मिटाना पड़ता है..तभी दूसरे के लिए जगह बनती है..जैसे-जैसे 'मैं' खत्म होता है..वैसे-वैसे मोहब्बत, बढ़ती चली जाती है..इश्क करने वाले जानते हैं कि इस दौलत को ना तो कोई छीन सकता है और ना ही कम कर सकता है..प्रेमी अगर मिल जाएं तो राधा-कृष्ण और ना मिल पाएं तो मीरा-कृष्ण.. +anshupriya prasad

Self Pity is addictive

मक्खन की तरह सारा वक्त कट जाए..ऐसी ज़िंदगी, किसी की भी नहीं होती..हर शख्स को अपने-अपने हिस्से के संघर्ष का सामना करना पड़ता है..और हमें लगता है कि सिर्फ हम ही मुसीबतों से जूझ रहे हैं..सहते-सहते, अपना दुख बढ़कर इतना बड़ा हो जाता है कि उसके सिवा कुछ भी दिखाई नहीं देता..उससे निपटने का तरीका भी सामने होता है लेकिन हम सेल्फ पिटी (Self Pity) में इतना डूबे रहते हैं कि उस पर नज़र ही नहीं जाती..सहानुभूति, दूसरों से रखना अच्छी बात है..लेकिन खुद पर तरस खाने से कुछ हासिल नहीं होगा..इसलिए ज़िंदगी में भले ही चाहें जैसी कमी रहे..अपने आपको इतना मजबूत बनाओ..कि ना तो खुद को अपने ऊपर तरस आए..और ना ही किसी और को.. +anshupriya prasad

गमों की फैक्ट्री

गम तो एक तरह की फैक्ट्री है..जहां इंसानों को तराशा जाता है..क्योंकि जब तक हमारी सहनशक्ति की बार-बार परीक्षा नहीं ली जाएगी..तब तक कभी ना रुकने, कभी ना हार मानने का हौसला कहां से आएगा..और जब तक खुद नहीं रोएंगे..तब तक दूसरों की तकलीफ कैसे समझ में आएगी..ये जितने भी छोटे-बड़े दुख, दर्द, मुसीबतें और परेशानियां हैं ना..ये कोई सजा नहीं हैं..बल्कि मजबूत और बेहतर इंसान बनने की कड़ियां हैं..इसलिए कुढ़-कुढ़ कर अपने दिमाग, शरीर और इमोशन की ताकत को जाया ना करो..इन कड़ियों को जोड़ो और कीचड़ में भी कमल बनकर खिलो..आसान ज़िंदगी चाहिए तो इंसान बनने का क्या फायदा..पशु-पक्षी बनकर ही जी लेते.. +anshupriya prasad

Only Love, No Pain..

अपनी ही आंखों में जब, किसी और का अक्स नज़र आए..और कदम-कदम पर सैकड़ों टन जादू बिखरने लगे..तो अपनी चाहत के इन पलों को हमेशा-हमेशा के लिए अपने दिल में कैद कर लो..क्योंकि दर्द, प्रेम में नहीं..प्रेम के ना होने में है..और जब दिल, मोहब्बत से लबालब भरा रहेगा..तो इबादत (Oneness) का रास्ता खुद-ब-खुद रोशन हो जाएगा.. +anshupriya prasad

Why don't we Succeed?

हमारी ख्वाहिशें इसलिए पूरी नहीं होतीं क्योंकि, हम अगर एक कदम आगे बढ़ाते हैं तो चार कदम पीछे खींच लेते हैं..एक पल में इरादा करते हैं और दूसरे ही पल ये सोचने लगते हैं कि ये कैसे होगा..ये तो बहुत मुश्किल है..हमारी किस्मत तो इतनी अच्छी नहीं है कि हमें ये मिल जाए..या फिर अरे, छोड़ो क्या करना है..आज तक कुछ मिला भी है जो आगे मिलेगा..इसी उधेड़बुन में हम लगातार पीछे और पीछे होते चले जाते हैं..ऐसे हालात में कितना भी मेहनत कर लो..कितना भी इरादा कर लो..कामयाबी नहीं मिलेगी..क्योंकि हम जितना आगे बढ़ते हैं उससे ज्यादा अपने आपको पीछे धकेल देते हैं..और जब कदम आगे ही नहीं बढ़ेंगे तो मंजिल तक कैसे पहुंचेगे..इसलिए अगर सचमुच कुछ पाना चाहते हो तो सारे किंतु-परंतु छोड़ दो..हमारा काम है अपने इरादे पर टिके रहना..और सही दिशा में मेहनत करना..वो कब होगा..कैसे होगा..ये सोचना हमारा काम नहीं है..कुछ चीजें समय पर भी छोड़ देनी चाहिए..+anshupriya prasad

Make the Best of it..

अपनी किस्मत से प्यार करना सीखो..फिर चाहें वो अच्छी हो या बुरी..क्योंकि अगर हम अपनी किस्मत को लगातार कोसते रहेंगे..तो वो बद् से बद्तर होती चली जाएगी..लेकिन अगर हम अपनी तकदीर से बिना शर्त बेपनाह मोहब्बत (unconditional Love) करेंगे..तो वो हमसे ज्यादा देर तक रूठी नहीं रह सकती..एक ना एक दिन तो उसे भी पलट कर प्यार करना ही पड़ेगा..इसलिए सबसे पहले जो मिला है और जो हो रहा है..उसे तहे दिल से स्वीकारो..और फिर उसे बेहतर कैसे बनाना है..इस बारे में सोचो..वैसे भी जब तक हम अपने मौजूदा हालात और चीज़ों के लिए शुक्रगुज़ार नहीं होंगे..तब तक बेहतर कल का रास्ता नहीं खुलेगा.. +anshupriya prasad

डांस के महासंग्राम में नाज़ुक सी दिव्यांका

नच बलिए जीतना आसान नहीं था..दिव्यांका त्रिपाठी के हर हफ्ते कोई ना कोई इंजरी हो जाती..स्लिप डिस्क, लिगमेंट टियर, बैक स्पैस्म, फ्रैक्चर, एंकल ट्विस्ट..और ना जाने क्या-क्या..दिव्यांका फिट थीं लेकिन उस लेवल की नहीं जिस लेवल की उनसे उम्मीद की जा रही थी..मुकाबला टफ था..डांस के महासंग्राम में फंस गईं थी नाज़ुक सी दिव्यांका..पहली ही पारी में आउट हो गईं..बैक की इंजरी ने दिव्यांका को पस्त कर दिया..लेकिन उन्होने हार नहीं मानी..उनके पति विवेक दहिया के बाद उन्हे सबसे ज्यादा सपोर्ट किया उनकी फिज़ियोथेरेपिस्ट फरनाज़ ने..फ़रनाज़ के भरोसे ने दिव्यांका को ऐसी हिम्मत दी कि चोटिल होने के बावजूद दिव्यांका डटी रहीं..और नच के मुकाबले में जान लगा दी..नतीजा सबके सामने है..उन्हे मिली है नच बलिए-8 की ट्रॉफी..और 9 किलो वजन कम होने का बोनस..इसे कहते हैं आम के आम और गुठलियों के दाम.. +anshupriya prasad
(दिव्यांका त्रिपाठी ये हैं मोहब्बतें सीरियल में डॉ इशिता भल्ला का किरदार निभाती हैं..)

खुद को कितना सताओगे?

अपने आप को चाहें धीरे-धीरे मारो या एक बार में..हमारे अंदर ये जो नन्ही सी जान है..बेचारी, उफ तक नहीं करेगी..यही वजह है कि हम जब चाहें तब अपने आपको दुखी करते रहते हैं..और वो भी चुपचाप सब कुछ सहती रहती है..अगर हमें, खुद से थोड़ा सा भी विरोध करना आता..तो हम ये कभी नहीं कर पाते..हैरत की बात है कि इसकी कोई सजा भी नहीं है..लेकिन सच्चाई तो ये है कि अगर दूसरों को सताना जुर्म है..तो खुद को सताना उससे भी बड़ा जुर्म है..इसलिए खुद के साथ नर्मी से पेश आया करो..और दूसरों को खुश रखने के साथ-साथ अपने आपको भी खुश रखना सीखो.. +anshupriya prasad

असली मज़ा तो सफ़र में है..

किसी को प्यार की तलाश है..किसी को मौके की..तो किसी को धन-दौलत की..सबकी चाहत अलग-अलग है क्योंकि जिसे जो चीज़ नहीं मिलती..बस, वही सबसे प्यारी बन जाती है..सारी ज़िंदगी हम उसी चीज़ की तलब में काट देते हैं..और दूसरी चीजें जो हमारे पास हैं उनकी कदर तक नहीं करते..ख्वाहिशें अच्छी हैं..लक्ष्य भी ज़रूरी हैं..और मंजिलें भी..लेकिन असली मज़ा तो सफ़र में है..कहीं ऐसा ना हो कि मंज़िल की तलाश में अपने ही खो जाएं..और कल की उम्मीद में हम आज, जीना छोड़ दें..इसलिए सफर को हसीन बनाना ज़रूरी है..मंज़िल का क्या है..जब ठान लिया है तो एक ना एक दिन मिल ही जाएगी.. +anshupriya prasad

अगर कोई चिढ़े, ताने मारे या मुंह फेर ले..

अगर कोई हमें पसंद नहीं करता..तो इसका मतलब ये नहीं है कि हमारे अंदर कोई कमी है..और हमें नापसंद करने वाला शख्स कोई बहुत बड़ी तोप है..क्योंकि बहुत सारे लोग तो अपने आप को ही पसंद नहीं करते..वो दूसरों को क्या खाक पसंद करेंगे..इसलिए अगर कोई चिढ़े, ताने मारे या मुंह फेर ले..तो परेशान मत होना..क्योंकि ये उसकी समस्या है, हमारी नहीं..हमें तो खुद ईश्वर ने अपने दिल में जगह दी है..तो फिर बंदों की राय से क्या फर्क पड़ता है.. +anshupriya prasad

देवी-देवता नहीं महानायक..

तैतींस करोड़ देवी-देवता सिर्फ इसलिए नहीं बताए गए कि हाथ जोड़ लिए और हो गई छुट्टी..इनमें से हरेक की ज़िंदगी से कुछ ना कुछ सीखने योग्य है..इन सभी ने विपरीत परिस्थितियों (adversities) में अदम्य साहस, बेजोड़ लगन और असाधारण काबलियत का परिचय दिया है..तभी तो सदियों बाद भी हम उन्हें याद करते हैं..असली मायनों में ये देवी-देवता नहीं अपने-अपने समय के महानायक हैं..क्या स्त्री और क्या पुरुष..सबने बुरे से बुरे हालात में अपनी योग्यता साबित की है..ये मिसाल हैं इस बात की कि हर इंसान इन्ही की ही तरह काबिल है..और हम सभी में महानायक बनने की क्षमता है..क्योंकि इस दुनिया में ऐसा कोई काम नहीं है जिसे हम कर नहीं सकते..बस हमें अपने आपको इस बात का यकीन दिलाने की ज़रूरत है.. +anshupriya prasad

अपने अंदर के हीरो को पहचानो..

सिर्फ एक दिन के लिए अपनी परेशानियां किसी और को देकर देखो..ज़िम्मेदारियों के बोझ से उसका दम ना निकल जाए तो कहना..क्योंकि हर इंसान को उतनी ही मुश्किलें मिलती हैं जितनी उसकी सहने की क्षमता होती है..कोई दूसरा ना तो हमारी तकलीफों का अंदाज़ा लगा सकता है और ना ही झेल सकता है..लेकिन हम हैं कि इसी दुख-दर्द के बीच ना सिर्फ आगे बढ़ते रहते हैं बल्कि मुस्कुरा भी लेते हैं..प्यार भरी दो बातें भी कर लेते हैं और ज़रूरत पड़ने पर दूसरों की मदद भी कर देते हैं..ऐसा एक हीरो के अलावा और कौन सकता है..इसलिए मायूस होने से पहले अपने अंदर के हीरो को पहचानो..जो ना तो रुकना जानता है और ना ही टूटना.. +anshupriya prasad

मां होती भी है या नहीं..

गर्भ (womb) में पल रहे किसी भी बच्चे को नहीं पता होता कि मां क्या होती है..वो कौन है..कैसी है..है भी या नहीं..मां के अंदर और मां का ही हिस्सा होने के बावजूद वो मां के अस्तित्व से अनजान रहता है..जन्म के बाद जब बच्चे को मां की गोद मिलती है तब उसे ज़िंदगी की सबसे पहली मिठास का अहसास होता है..मां की ही तरह ईश्वर (Divine) भी हर पल, हर जगह हमारे साथ हैं..हम उन्ही के अंदर और उन्ही का हिस्सा हैं..लेकिन फिर भी उनके होने का सबूत मांगते हैं..और मंदिरों, मस्ज़िदों में उन्हें ढूंढते रहते हैं..लेकिन जो हर जगह मौजूद हैं..वो सिर्फ गीता, कुरान, बाइबिल में तो मिलेगें नहीं..उनकी मौजूदगी को तो बस महसूस किया जा सकता है.. +anshupriya prasad

Tomorrow will never disappoint..

बहुत बुरा लगता है जब सारी प्लानिंग फेल हो जाती है..और वैसा नहीं होता जैसा हम चाहते हैं..लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है वैसे-वैसे हम ये सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि अच्छा ही हुआ कि हम जो चाहते थे वो नहीं हुआ..क्योंकि अभी जो हो रहा है..वो तो हम कभी सोच भी नहीं सकते थे..इसलिए हर छोटी-बड़ी चीज़ जो हमें नहीं मिल पाती है..उसे दिल से लगाकर मत बैठो..कई बार हम उतना बेहतर नहीं सोच पाते हैं जितना भविष्य के खजाने में हमारे लिए छुपा हुआ है..सच तो ये है कि अगर आज ये नहीं होगा..तो कल उससे भी बढ़िया होगा.. +anshupriya prasad

खुशियों का हिसाब-किताब..

चलो, आज से खुशियों का हिसाब-किताब रखते हैं..गमों को जाने देते हैं और सिर्फ खुशियों की गिनती करते हैं..एक डायरी बनाते हैं जिसमें हर दिन के ठहाकों, मुस्कुराहटों और खिलखिलाहटों का जिक्र हो..शुरुआत में तो ऐसे पल ढूंढे नहीं मिलेंगे..ऐसा लगेगा कि हंसना तो दूर, हम तो दिल से मुस्कुराना तक भूल गए हैं..लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतेंगे, डायरी के पन्ने कम पड़ने लगेंगे..और फिर सिर्फ डायरी ही नहीं, ज़िंदगी भी खुशियों से भरने लगेगी.. +anshupriya prasad

दिमाग का किस्मत कनेक्शन

दिमाग का भी किस्मत कनेक्शन होता है..क्योंकि बचपन से ही हमारे दिमाग में कई बातें अपने आप दर्ज (feed) होती रहती हैं..जैसे किस्मत का अच्छा या बुरा होना, भाग्य से ज्यादा किसी को नहीं मिलना..हम इन बातों पर इसलिए विश्वास करने लगते हैं क्योंकि हमारे आसपास रहने वाले ज्यादातर लोग ऐसी ही बातों पर यकीन रखते हैं..ये बातें जाने-अनजाने हमारे दिमाग में इतनी गहरी बैठ जाती हैं कि जरा सी अड़चन आते ही हमें लगता है कि हमारा तो समय ठीक नहीं है इसलिए कोई काम नहीं बन रहा..और अगर थोड़ी-बहुत मेहनत कर ली और फिर भी सफलता हाथ नहीं लगी तो डंके की चोट पर ये मान लिया जाता है कि हमारी तो किस्मत ही खराब है, हमें तो कोई भी चीज कभी मिल ही नहीं सकती..अब जब मन की गहराइयों में इतनी नकारात्मक (negative) बातें भरी रहेंगी तो हौसला कहां से आएगा..कोई भी काम करते-करते अगर खुद का मन ही निराशा से भर उठे तो यकीन मानिए वो काम कभी पूरा नहीं होगा..इसलिए हथियार डालने का कोई फायदा नहीं..संघर्ष तो वैसे भी करना ही पड़ रहा है..तो क्यों ना हम इसे अपनी खुशी से चुनें..कम से कम सफल होने की उम्मीद तो होगी.. +anshupriya prasad

दर्द, कितना भी प्यारा हो..

दर्द की भी अपनी एक उम्र होती है..फिर चाहें हम उसे कितना भी जकड़ें..एक दिन दर्द हमें छोड़कर चला ही जाता है..क्योंकि हमारे अंदर जो जीने की चाह है वो किसी भी तरह के दुख-दर्द से छुटकारा पाने की लगातार जद्दोजहद करती रहती है..हमें भले ही इसका अहसास ना हो..लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है..ये जंग और भी घमासान होती जाती है..यही वजह है कि चोट, कितनी भी गहरी हो..दर्द, कितना भी प्यारा हो..एक दिन उसे टाटा-बाय-बाय कहना ही पड़ता है..इसलिए दर्द से कैसी यारियां.. +anshupriya prasad

Make your Life now..

किसी भी शख्स को देखकर ये अंदाजा़ लगाया जा सकता है कि 10 साल पहले वो कैसा था..अगर वो खुश है..तो इसका मतलब है कि पिछले कुछ समय से वो अपनी खुशियों के लिए कोशिश कर रहा है..अगर वो दुखी है तो इसके मायने हैं कि वो बिना सोचे-समझे बस जिए जा रहा है..क्योंकि हम आज जो भी करते हैं उसका असर अगले 5 से 10 सालों में दिखाई देने लगता है..इसलिए अभी से अपना लक्ष्य बनाएं कि अगले 10 साल बाद आप कैसी ज़िंदगी चाहते हैं..जो सोचा है उस पर डटे रहें.. मुश्किलें आने पर भी निराश ना हों..कुछ ही समय में इसका असर दिखाई देगा और हर रास्ता, मंज़िल की तरफ खुलने लगेगा.. +anshupriya prasad

Meditation is not for lovers

People in Love, don't need to meditate..because Love itself is a meditation..Fulfilled or Unfulfilled..anything would work..If you can keep Love alive in everything you do.. +anshupriya prasad

'Live in the Moment'

जब सब कुछ पाकर भी खाली-खाली सा लगे..और दिल कसमसा कर कहे कि जीना तो अभी बाकी है..तो इसका मतलब है कि हमने ज़िंदगी का स्वाद कभी चखा ही नहीं..या तो जो बीत गया, उसमें ही जीते-मरते रहे..या फिर जो हुआ नहीं, उसी के बारे में सोचते रहे..लेकिन सच तो ये है कि ये लम्हा, जो अभी इस वक्त है..बस, वही हमारे हाथ में है..हम, इसी का भरपूर फायदा उठा सकते हैं..तो क्यों ना अगला-पिछला एक तरफ रख कर, सिर्फ और सिर्फ मौजूदा पल में जीने की आदत डालें..तभी असल मायनों में जीने का अहसास होगा.. +anshupriya prasad

उसका मज़हब मत छीनो..

धर्म कोई आडंबर नहीं बल्कि जीवन शैली (lifestyle) है..मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा जाए बिना भी हम धार्मिक हो सकते हैं..क्योंकि जब तक हम ईश्वर (Divine) के साथ अपना पर्सनल कनेक्शन जोड़ना नहीं सीख जाते..तब तक धर्म ही हमारी उंगली पकड़ कर हमें चलना सिखाता है..इसलिए किसी से भी उसका मज़हब कभी मत छीनो.. +anshupriya prasad

Magic of love

If you love someone then you can not hate anyone..That's the magic of the true love.. +anshupriya prasad

Love truly

When the world is seen through the prism of heart, all the good things magnify..and the Love, you were looking for..comes back to you with it's full force..So Love truly before expecting.. +anshupriya prasad

छाती फाड़ इश्क..

मोहब्बत अगर..सिर्फ जिस्मानी होती तो रूह को इतनी छटपटाहट ना होती..प्यार अगर..महज़ छूने से जताया जा सकता तो निगाहों को चेहरा पीने की तलब ना होती..बेशुमार इश्क से जब छाती फटने लगती है तो आंखों से दुआएं (compassion) बरसती हैं..और फिर 'वो' एक शख्स सारी कायनात से जुड़ने का जरिया बन जाता है.. +anshupriya prasad

When love is denied..

You are lucky if you are constantly denied Love..Stop burning yourself with it's pain..Lit your heart instead..Shine but never beg or chase..because that person only has this much role in your life..So forgive but don't forget..Let this light guide you to the unknown path of life.. +anshupriya prasad

Take advantage Now..

जैसा भी वक्त है..जो भी हालात हैं..हमारे हैं..जीने के लिए हमें यही मिले हैं..तो क्यों ना इसी का भरपूर फायदा उठाया जाए..क्योंकि अच्छा वक्त, अगर खुशियां देता है..तो बुरा वक्त, रफ एंड टफ (मजबूत) बनाता है..अच्छी किस्मत, अगर बैठे-बिठाए स्टार बनाती है..तो बुरी किस्मत, असली हीरो बनने का मौका देती है..इसलिए हालात बदलने से पहले अपना नज़रिया बदलो..जब अच्छी-बुरी चीजों के पीछे छुपा मकसद समझ में आने लगेगा..तो हर चीज़ अपने फायदे (Favour) में लगने लगेगी.. +anshupriya prasad

और आंच डालो..

जिसने बार-बार मज़ाक उड़ाया और तानों के नश्तर चुभोए..उसने कुछ कर दिखाने की ज़िद दी..जिसने हर बार भरोसा तोड़ा और कभी मदद नहीं की..उसने खुद पर, खुदा पर यकीन करना सिखाया..जिसने छोटी-छोटी चीजों के लिए रुलाया और पग-पग पर रोड़े अटकाए..उसने मुश्किलों से निपटने का हौसला दिया..तो आओ..और आंच डालो..और जलाओ..अब ना तो तड़प है और ना ही घुटन है..क्योंकि हमने तो तप-तप कर निखरने की ठान ली है.. +anshupriya prasad

हिम्मत तो खुद ही करनी पड़ेगी..

हमें लगता है कि हमारे हालात खराब हैं इसलिए हम आगे नहीं बढ़ पाते..लेकिन हकीकत ये है कि हमारी अपनी सोच हमें आगे नहीं बढ़ने देती..जब भी हम कुछ नया और बेहतर करना चाहते हैं तो हमारा दिमाग मुश्किलों और नाकामयाबी का ऐसा ताना-बाना बुनता है कि हम ये सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि ये तो हमारी किस्मत में ही नहीं है..बेकार है कोशिश करना..लेकिन सच तो ये है कि जो अपनी मदद खुद नहीं करता..उसकी मदद तो खुदा भी नहीं कर सकते..वैसे भी कोई और तो आएगा नहीं ज़िंदगी संवारने..हिम्मत तो खुद ही करनी पड़ेगी..कदम भी खुद ही बढ़ाने पड़ेंगे..तभी तो मंज़िलों का फासला तय होगा.. +anshupriya prasad

ज़िंदा हैं हम..

सौ बार गिरो तो सौ बार उठो..हज़ार बार आंसू बहें तो हज़ार बार पोंछो..क्योंकि ज़िंदगी है तो मुश्किलें हैं..और मुश्किलों से लड़ने का हौसला है तो ज़िंदा हैं हम..सूरज जैसा शक्तिमान भी सिर्फ इसलिए फलक पर है क्योंकि वो हर रोज़ अंधेरे से लड़ता है..चंद्रमा को भी अपने वर्चस्व की जंग लगातार लड़नी पड़ती है..तब जाकर पूनम का चांद नसीब होता है..तो फिर हताश क्यों होना..जब तक जूझोगे नहीं तब तक अपनी अहमियत कैसे साबित करोगे... +anshupriya prasad

हर नारी अपने आप में संपूर्ण है..

राम के बिना सीता अधूरी नहीं..कान्हा के भुला देने के बावजूद भी राधा का अस्तित्व है..क्योंकि राधा वो है जिसने साक्षात ईश्वर को प्यार करना सिखाया..और सीता ने अगर मर्यादा का पालन नहीं किया होता तो राम कभी मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं कहलाते..सीता और राधा दोनों जानती थीं कि हर नारी अपने आप में संपूर्ण (Complete) है..नाज़ुक दिल और बेपनाह इमोशन्स, उसकी ताकत हैं..कमज़ोरी नहीं..इसलिए ना तो कभी राधा ने द्वारका तक श्री कृष्ण का पीछा किया..और ना ही कभी सीता ने राजा राम के राजपाट की तरफ पलट कर देखा..इसलिए आत्म सम्मान (Dignity) और शालीनता (Grace) से जीना सीखो..फिर चाहें सामने भगवान ही क्यों ना खड़े हों.. +anshupriya prasad