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Showing posts from 2016

उजाले तेरी यादों के..

चलो अच्छा हुआ कि अब धुंध पड़ने लगी,
बहुत दूर तक तकती थीं निगाहें मेरी, तेरी राहों को..

फिर से जी लो सत्रहवां साल..

खिली-खिली सी तबीयत और दिल मे जोशीला तूफान लेकर आया है सत्रहवां साल..यानी 2017..एक, दो नहीं..पूरे बीस सवेरों की रोशनी लिए..हैप्पी वाले इस न्यू इयर ने सबको मौका दिया है उम्र का सबसे हसीन साल एक बार फिर से जीने का..तो अब नादानियों में समझदारी के जुगनू झिलमिलाने दो..और पहले से भी ज्यादा जोश और उमंग के साथ तैयार हो जाओ सत्रहवां साल जीने के लिए..Wishing you a Magical New Year 2017.. May all your Wishes come True.. +anshupriya prasad

लिख दो नई तकदीर..

इस दुनिया के मुकाबले हम एक ज़र्रा (particle) या एक बिंदु भी नहीं हैं..और अगर ये ज़र्रा अपनी किस्मत से ज्यादा पाने की हसरत रखे तो सोचो उसे कितनी मेहनत करनी पड़ेगी..अगर सचमुच कुछ पाना चाहते हो तो अपना तन-मन सपनों की आग में झोंक दो..और इतना तपो कि सूरज की आंच भी फीकी पड़ जाए..जब एक ज़र्रे में इतनी अगन होगी तो पूरी कायनात पिघल कर मजबूर हो जाएगी एक नई तकदीर लिखने के लिए.. +anshupriya prasad

Love Unconditionally

Love doesn't come with an Expiry date..If your Loved ones can make you angry or miserable..that means you have never truly Loved them..Whether you get anything in return or not..Love is Pure and Eternal..Try to Love Unconditionally and Wholeheartedly..So Smile and open your heart to the most Miraculous and Empowering emotion..Love..Stay there..Always.. +anshupriya prasad

"पलकें चमकने लगी हैं, अब ख्वाब कैसे छुपाऊं.."

आंखें भरनी हैं तो सपनों से भरो, आंसुओं से नहीं..क्योंकि आंसू तो छलक जाएंगे लेकिन सपने दूर फलक तक ले जाएंगे..इसलिए जब भी दिल में कोई टीस उठे, एक सपना पलकों पे सजे.. +anshupriya prasad

ये मेरा आसमां है..

आंसुओं को सजाओ, संवारो और मुस्कुराहट के मोतियों में बदल दो..गमों को झाड़, पोंछकर भूली-बिसरी यादों के संदूक में बंद कर दो..और दर्द से कह दो कि वो अपनी हद में रहे..क्योंकि ये मेरी ज़मी है, जहां मुझे चलना है..ये मेरा आसमां है, जहां मुझे उड़ना है..यहां मैं हूं और मेरे अपने हैं..मेरी इस छोटी सी दुनिया में दुख-दर्द का क्या काम..मुझे तो हर हाल में मुस्कुराना है अपने लिए..अपनों के लिए.. +anshupriya prasad

अपनी कीमत साबित कर..

जब दिल टूटता है तो इंसान कुछ बन जाता है..ठोकरें, चलना सिखा देती हैं..और मुश्किलें, पहाड़ जैसा मजबूत बना देती हैं..क्योंकि जबतक हीरे की परख नहीं होगी..उसकी कीमत कैसे पता चलेगी..वैसे भी बेशकीमती वही साबित होगा..जो ज़िंदगी की कसौटी पर खरा उतरेगा..और जिन्हे ज़िंदगी परखेगी नहीं..उन्हें तो कोई कौड़ियों के मोल भी नहीं पूछेगा.. +anshupriya prasad

Love knows it's way

मोहब्बत का दर्द जब हद से गुज़रने लगता है तो इबादत बन जाता है..सच्चे इश्क की तासीर ही कुछ ऐसी है कि दिल से निकली हर आह, दुआ बन जाती है..प्रेमी मिले चाहें ना मिलें..रहते, हमेशा साथ हैं..कहते हैं मीरा ने इतने प्यार से कान्हा को देखा कि मीरा, कान्हामय और कान्हा, मीरामय हो गए.. +anshupriya prasad

जो मिला है उसकी कदर करना सीखो..

इस दुनिया में कोई भी ऐसा नहीं है जिसे नेमतों (Blessings) से ना बख्शा गया हो..लेकिन अगर फिर भी किसी को ऐसा लगता है कि ज़िंदगी ने मुझे कुछ भी नहीं दिया..तो वो सिर्फ दिल से ही नहीं दिमाग से भी गरीब है..क्योंकि जो हमें मिला है उसे झुठलाया नहीं जा सकता..बहुतों के पास तो उतना भी नहीं होता..लेकिन फिर भी वो ज़िंदगी जीने का हौसला रखते हैं..सच तो ये है कि शुक्रगुज़ार बने बिना बेहतरी की राह पर चलना मुमकिन नहीं..जो मिला है उसकी कदर करना सीखो..क्योंकि यही हमारी ताकत है..इसी से हमें हिम्मत मिलती है..और बिना हिम्मत के सपनों के सफ़र तय नहीं किए जाते.. +anshupriya prasad

Love never fails

प्यार, अगर करना है तो पहले अपने आप से करो..खुशियां, अगर बांटनी हैं तो पहले खुद खुश रहना सीखो..क्योंकि जब तक हम अपने आप से मोहब्बत नहीं करेंगे..तब तक किसी को भी 100% प्यार नहीं दे पाएंगे..और जब तक खुद खुश नहीं रहेंगे..तब तक अपनों को 100% खुश नहीं रख पाएंगे..वैसे भी हम वही दूसरों को दे सकते हैं जो हमारे पास मौजूद हो..तो ये दीवाली Love और Happiness के नाम..खूब खुश रहो और बेहिसाब खुशियां बांटो.. +anshupriya prasad

यकीन वो है..जो अनहोनी को भी पलट दे..

समय कभी अच्छा या बुरा नहीं होता..हमारी सोच, हमारा नज़रिया..इसे अच्छे या बुरे में तब्दील कर देता है..अगर हम ये मानकर बैठ जाएं कि हमारा समय खराब चल रहा है..और आसपास होने वाली हर चीज़ को अपनी बदकिस्मती से जोड़ने लगें..तो दुनिया की कोई भी ताकत उस समय को अच्छे में नहीं बदल सकती..लेकिन अगर हम इस बात का यकीन रखें कि समय हमेशा अच्छा होता है..कभी गम, कभी खुशी..तो लगे ही रहते हैं..साथ-साथ बेहतरी की दिशा में भी लगातार प्रयास करते रहें..तो समय की गाड़ी अपने आप ही पटरी पर आ जाएगी..और बिगड़े काम भी बनने शुरू हो जाएंगे..क्योंकि यकीन वो है..जो अनहोनी को भी पलट दे..फिर चाहें वो खुद पर हो या खुदा पर.. +anshupriya prasad

बेटा पिता के लिए तड़पे तो कलम बहाए आंसू

प्रिय पापा,
मुझे तुम रोज़ याद आते हो, मैं तुम्हें रोज़ याद करता हूँ..
तुम्हीं ने कहा था यहाँ से जो जाता है, वो वहाँ चला जाता है तारों में ,
एक तारा बन जाता है, अब ये बात मैं जानता हूँ कि ग़लत है पर मानता नहीं कि ग़लत है,
मुझे आसमां के हर तारे से बात करना अच्छा लगता है... क्यूंकि उनमें छुपा मेरा बचपन लुका छुपी खेलता है,
अपने आप को कभी छुपाता /कभी ढूंढता है/ और गाहे ब गाहे पा भी लेता है/ उस वक़्त जब किसी तारे में तुम दिखाई दे जाते हो/
तुम्हें इस तरह पकड़ लेना बहुत अच्छा लगता है/ तुम से लिपट जाना अच्छा लगता है/
क्यूंकि ये आगोशी रूहानी होती है/ जिस्मानी नहीं कि तुम बस यूँ ही चले जाओगे और/
मैं वेदों की , शास्त्रों की ऋचाएं सुनता बिलखता तुम्हें पञ्च तत्व में विलीन कर आऊँगा /
यूँ अचानक रातों रात राजकुमार से राजा बन जाऊंगा/ काँटों वाले ताज से मस्तक सजाऊँगा/ और बच्चे से बड़ा बन जाऊंगा/ हर बार तुम मेरा बचपन नहीं छीन पाओगे /
मैं तुम्हें याद करता रहूँगा और तुम ये वादा करों कि तुम मुझे याद आते रहोगे / 
क्यूंकि मुझे ये झुठलाना अच्छा लगता है, जो किसी ने उस रोज़ कहा था,
" वक़्त हर ग़म भुला देता है धीरे धी…

Surgical Strike against Pak

कुछ खुशियां कितनी कॉमन होती हैं..सबके दिलों में एक साथ समा जाती हैं..कुछ मुस्कुराहटें भी सेम टु सेम होती हैं..जादू की तरह एक चेहरे से दूसरे चेहरे तक फैलती चली जाती हैं..जंग छेड़ना हमारी फितरत नहीं लेकिन अपनी रक्षा करना हमारा धर्म है..तभी तो पूरा देश एक साथ मुस्कुरा उठा है..जय हिन्द की सेना..जय हिन्द.. +anshupriya prasad

जितनी ज़्यादा नफ़रत, उतना गहरा रिश्ता

जिस तरह से प्यार से रिश्ते बनते हैं उसी तरह नफ़रत से भी अटूट रिश्ते बनते हैं..नफ़रत हमारी रूह पर फेविकॉल के जोड़ की तरह चिपक जाती है..और फिर हम जन्म-जन्मांतर तक उन लोगों को ढोते रहते हैं जिन्हें हम एक पल भी बर्दाश्त नहीं कर सकते..कहते हैं, जितनी ज़्यादा नफ़रत, उतना ही गहरा रिश्ता हमारे हाथ की लकीरों में लिख दिया जाता है..इसलिए भलाई इसी में है कि उन लोगों से रिश्ते सुधार लिए जाएं..जो हमारे करीबी तो हैं लेकिन लगातार चोट पहुंचाते रहते हैं..और अगर ये मुश्किल लगे तो उन्हें माफ़ कर दो..ऐसा करने से भले ही अगला जन्म सुधरे या ना सुधरे..लेकिन ये जन्म ज़रूर सुधर जाएगा.. +anshupriya prasad

Gratitude is the Key

जब कुछ काम नहीं आता तो दुआ काम आती है..प्रार्थना (Prayer) में इतनी शक्ति है कि वो बड़े से बड़ा चमत्कार कर सकती है..लेकिन उससे पहले ये ज़रूरी है कि जो मिला है उसमें खुश रहना सीखो..फिर चाहें हालात कैसे भी हों..शिकायतें बंद करो और अपनी नेमतों (Blessings) के लिए सच्चे मन से खुदा के शुक्रगुज़ार बनो..जब ईश्वर से इतना कनेक्शन जुड़ जाएगा तब कोई भी दुआ..कोई भी प्रार्थना..कभी खाली नहीं जाएगी..क्योंकि हमारी प्लानिंग फेल हो सकती है लेकिन ईश्वर की नहीं.. +anshupriya prasad

क्योंकि हार में भी जीत है..

असफलता नाम की कोई चीज़ नहीं है..हम हारा हुआ इसलिए महसूस करते हैं क्योंकि दूसरे उसे हमारी नाकामयाबी समझते हैं..लेकिन सही मायनों में वो एक सीख है..जिससे सबक लेकर हमें आगे बढ़ना चाहिए..वैसे भी जंग जितनी घमासान होती है योद्धा का कौशल उतना निखरता है..इसलिए हार मत मानो..कोशिश करते रहो..क्योंकि जो गिरेगा नहीं वो चलना कैसे सीखेगा.. +anshupriya prasad

Awaken to Love

Love can make you do things which aren't possible otherwise. It can transform life to the extent that it turns into miracle..Whether you get the person or not..it doesn't matter. Either way, it's the sweetest emotion..keeps you alive..and happens to those who are absolutely worth it. So don't fall, always rise in Love. +anshupriya prasad

आंसू बहते हैं तो बहने दो..

जब तक पीड़ा नहीं होगी..तड़प नहीं होगी..तब तक ज़िंदगी को बेहतर बनाने की अलख कैसे जगेगी..कौन खुशियों का मोल जान पाएगा..कैसे सुख की अभिलाषा होगी..ये दुख ही है जो हमें तपाकर सही रास्ते पर चलना सिखाता है..ये दर्द ही है जो हमें अंदर से ताकत देता है..इसलिए आंसू बहते हैं तो बहने दो..छटपटाहट होती है तो होने दो..कदम, आगे बढ़ते रहें..निगाहें, लक्ष्य से हटे नहीं..और सीना, स्वाभिमान से धधकता रहे.. +anshupriya prasad

वो हर जगह है..

ऐसी सुबह पहले कभी नहीं हुई..ऐसा सूरज पहले कभी नहीं निकला..दर्द की लंबी-काली रात के बाद जब सूरज निकलता है तो वो ऐसे जगमगाता है मानो तन-मन के अंधेरों को खींच-खींच कर बाहर निकाल रहा हो..लेकिन हम हैं कि अपनी रोजमर्रा की उलझनों में ऐसे फंसे रहते हैं कि ये सब कभी महसूस ही नहीं कर पाते..प्रकृति हमें दिन-रात जीवन के संदेश देती रहती है लेकिन हम उन्हे कभी पढ़ते ही नहीं..हम सब प्रभु की कृपा (Grace) में हैं लेकिन फिर भी उससे अनजान हैं..शायद इसलिए कि वो हर जगह हैं..अगर वो एक जगह होते और दूसरी जगह नहीं होते तो उन्हे पहचानना आसान होता..लेकिन जो हर जगह फैला है उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है..जिस दिन से हम खुदा के वजूद को महसूस करना शुरू कर देंगे..उस दिन से सारे डर खत्म हो जाएंगे और ज़िंदगी बहुत आसान हो जाएगी.. +anshupriya prasad

जीने का सलीका

ये रात भले ही आंसुओं से भीगी थी लेकिन इसकी सुबह गुलाबी होगी..ये दिन भले ही धक्के खाते बीता लेकिन इसकी रात सुकून भरी होगी..ये उम्मीद कभी टूटे नहीं..ये हौसला कभी छूटे नहीं..क्योंकि जन्म पर तो हमारा बस नहीं था लेकिन जीने का सलीका ज़रूर हमारे हाथ में है..ये हमें तय करना है कि हमें रोते-कलपते हुए अपनी ज़िंदगी बितानी है या फिर एक हीरो की तरह हर गम, हर दर्द में हंसते-मुस्कुराते हुए जीना है..जिस दिन हम ये तय कर लेंगे..उस दिन से सुख और दुख को देखने का हमारा नज़रिया बदल जाएगा..फिर मुश्किलें उम्र भर के आंसू नहीं, ज़िंदगी भर की सीख देंगी..और तब हम किस्मत को कोसने के बजाए कुछ कर दिखाने और आगे बढ़ने के सपने देखेंगे.. +anshupriya prasad

लाडो ने जब पहनी साड़ी

घूंघट में इठलाए गुड़िया रानी..

'I believe I can fly'

अगर आप सोचने, समझने और चुनाव करने के काबिल हैं तो आप अपने हालात बदलने की भी क्षमता रखते हैं..लेकिन अगर हम अपनी बेहतरी की दिशा में लगातार कोशिश नहीं करते और जैसा चल रहा है वैसा चलने देते हैं तो अपनी बदहाली के लिए भी हम खुद ही ज़िम्मेदार होंगे..क्योंकि जितने भी लोग फर्श से अर्श तक पहुंचते हैं..उनके अंदर एक जुनून होता है..अपने आपको साबित करने का..ऐसे लोग बड़ी से बड़ी कठिनाई से भी हताश नहीं होते..उन्हे तो बस अर्जुन की तरह सिर्फ मछली की आंख दिखाई देती है जिसका निशाना उन्हे लगाना है..तो जब कुछ लोग अपने सपनो के पंख फैलाकर आसमान छू सकते हैं तो हम क्यों ज़मीन पर फड़फड़ाते रह जाएं..चलो, एक बार उड़ने की कोशिश तो करें.. +anshupriya prasad

बारिश का लुत्फ़

जब एक बादशाह का बारिश में नहाने का मन होता है..तो साजो सामान जुट ही जाता है...

उम्मीदों का सूरज

बहुत रो लिया..बहुत सो लिया..

                                       अब नींद से जगी हूं मैं..अब दर्द से उबरी हूं मैं..

                                       अब ना रुकना है..ना थकना है..बस चलते ही जाना है..

                                       रास्ते, कठिन हैं..मंज़िलें, ओझल हैं..

                                       लेकिन दिल में हौसलों का जोश है..मन में उमंगों की उड़ान है..

                                       ये नया आज है..जिसकी दहलीज़ पर सुनहरे कल का सूरज दस्तक दे रहा है

                                       गौर से सुनोगे तो ये दस्तक तुम्हें भी सुनाई देगी..

                                       क्योंकि उम्मीदों का ये सूरज सिर्फ मेरा नहीं, हम सबका है.. +anshupriya prasad

ईद मुबारक

तुम जियो नफ़रत में अपनी, मुझे मेरे दिल की शांति मुबारक!..तुम जिन लोगों को देखकर रोज़ अपना खून जलाते हो, मैं उन्हीं लोगों में थोड़ी सी अच्छाई ढूंढ लूंगी..तुम धर्म की आड़ में इंसानियत का गला का घोंटते रहो, हम इंसानियत को ही अपना धर्म मानेंगे..जियो तो ऐसे जियो कि खुदा को भी अपने बंदों पर नाज़ हो..नफ़रत से तो घर के चिराग सिर्फ बुझे हैं, कभी जले नहीं..अंधेरों से परे पाक चांद की रोशनी में आप सभी को ईद मुबारक..  +anshupriya prasad

चलो मुस्कुराने की वजह ढूंढे

ज़िंदगी की दौड़ में,
                                                   तज़ुर्बा कच्चा ही रह गया..
                                                   हम सीख न पाए 'फरेब'
                                                   और दिल बच्चा ही रह गया !

                                                    बचपन में जहां चाहा हंस लेते थे,
                                                    जहां चाहा रो लेते थे...

                                                     पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए
                                                     और आंसुओ को तन्हाई !

                                                     चलो मुस्कुराने की वजह ढूंढते हैं...
                                                     ज़िंदगी तुम हमें ढूंढो...
                                                     हम तुम्हे ढूंढते हैं ...!!!

                                                      मनीष जैन की कलम से

धर्म

कभी राम के चरित्र पर उंगली..तो कभी कान्हा के..कभी शिवलिंग पर सवाल तो कभी माता की शक्ति पर..दूसरों की छोड़िए यहां तो लोग अपने ही धर्म का मज़ाक बनाने लगे हैं..हम ये भूल गए हैं कि हमारे भगवान मानव रूप में ज़रूर हैं लेकिन वो मानव नहीं हैं..भगवान की मानवीय साज-सज्जा, उनके काम और यहां तक कि उनके रंगों के पीछे भी अलग-अलग और गहरे मतलब छुपे हुए हैं..वैसे भी सिर्फ मंदिर जाना और पूजा करना ही धर्म नहीं है..हिन्दू धर्म एक जीवन शैली है..इसलिए इसका दूसरे धर्मों से कोई बैर नहीं..हम सबके साथ मिल जुलकर भी अपने धर्म का पालन कर सकते हैं..ज़रूरी नहीं है कि जो चीज़ें हम बचपन से देखते आए हैं वही सही हों..अगर कुछ लोगों ने अपने फायदे के लिए हिन्दू धर्म का स्वरूप बिगाड़ दिया है तो ये ज़िम्मेदारी हमारी है कि हम अपने धर्म के असली रूप को पहचानें और उसे सही मायने में अपनाएं.. +anshupriya prasad

स्टाइल में रहने का..

गर्मी का कूल-कूल स्टाइल

एक खूबसूरत प्रेमकहानी जो हकीकत में बदल गई..

'मैं एक लड़की से खूब हंसी-मज़ाक करता था, खूब खुश रहता था, फिर 7 साल बाद उससे मेरी ख़ुशी बर्दाश्त नहीं हुई..और उसने 26 अप्रैल 2016 को मुझे अपना Husband बना लिया..
वो लड़की....मेरी ज़िंदगी...मेरी जान...मेरी पत्नी...कल्पना है...आई लव यू कल्पना...
प्रिय दोस्तों...कहते हैं पहला प्यार मिलता नहीं...मुझे मेरा प्यार मिला है मैने अपने प्यार को पाया है...और पूर्ण रूप से मिला है...शब्द तो नहीं हैं मेरे पास...फिर भी क्या कहूँ...बस ईश्वर...
मांगा है मैने श्याम से, वरदान एक ही
तेरी कृपा बनी रहे, जब तक है ज़िंदगी
दोस्तों आज बताऊं आप को...मेरी शादी लव और अरेंज दोनों ही थी.. दोस्तों...आज बड़ों के सादर चरणस्पर्श...सादर मुझे भी आशीर्वाद चाहिये...क्यों क़ि साक्षात् बड़ों का आशीर्वाद ही स्वयं भगवान है...कि मेरा ये जन्म जन्मों का बंधन जन्मों तक हर जन्म में बंधा रहे...और ईश्वर मुझे हर जन्म में मेरी कल्पना को ही मुझे दे...राधे..राधे..' बल्देव सिंह

मंज़िलें बुला रही हैं..

जो किस्मत से स्टार नहीं होता..वो मेहनत से बनता है..क्योंकि जब मंज़िलें बुलाती हैं तो रास्ते खुद बनाने पड़ते हैं..अपने लक्ष्य को दिल और दिमाग में ऐसे बसा लो कि खुद मंज़िल तड़प कर कह उठे कि 'अब आ भी जा..कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूं'.. +anshupriya prasad

नन्ही परी

चोरी-चोरी ताके बिटिया रानी

ये आंसू कभी ना छलकें..

आंख में आंसू तभी अच्छे लगते हैं जब उन्हें अपनी पलकों में समेटने वाला सामने हो..अगर आपकी ज़िंदगी में ऐसा शख़्स नहीं है..तो कभी रोना नहीं..क्योंकि उन आंसुओं के छलकने का फ़ायदा ही क्या..जिनकी कोई कीमत ना हो.. +anshupriya prasad

आम रसीले आम..

मीठे-मीठे आम खाकर गुनगुन की आंखें चमक जाएं..

जहां चाह, वहां राह

बाल छोटे हैं तो क्या हुआ..ननद की शादी में जूड़ा तो बन ही सकता है..

लम्हे फ़ुर्सत के

जब ऑफिस में काम करते-करते मन थक जाए...तो ब्रेक तो बनता है...

तड़प

होठों पर हंसी, दिल में है तड़प तेरे..
                                 तेरा चेहरा पढ़ लेता हूं, क्या छुपाता है मुझसे गुनहगार मेरे..

ज़िंदगी कोई सजा नहीं

ज़िंदगी के सफ़र में कुछ लोग जुड़ते हैं..कुछ जुदा हो जाते हैं..कुछ चीजें मिल जाती हैं..कुछ नहीं मिल पाती हैं..इस बात से हम खुश हों या सिर पटकें..ज़िंदगी अपनी रफ्तार से चलती रहती है..इसलिए इस वक्त जो भी हमारे पास है उसे इन्जॉय करो..क्योंकि जो बीत गया सो बीत गया..और जो आया नहीं उसके बारे में सोचकर अपनी जान क्यों हलकान करना..अगर अनुभव अच्छा है तो शुक्रिया अदा करो..खराब है तो सबक लो..ज़िंदगी कोई सजा नहीं बल्कि एक खूबसूरत तोहफ़ा है..दोनों बाहें फैलाकर इसका स्वागत करो.. +anshupriya prasad

पापा की लाडो

थोड़ी शैतानी हो जाए

दिल के कनेक्शन

जो लोग आपको देखकर गुलाब की तरह खिल जाते हैं उन्हें हमेशा संभाल कर रखें..फिर चाहें उनसे कोई रिश्ता हो या ना हो..क्योंकि इस दुनिया में भले ही अरबों लोग हैं लेकिन हमें देखकर खुश होने वाले लोग बहुत कम हैं..वैसे भी ये ज़रूरी तो नहीं कि हर अहसास को नाम दिया जाए..और हर रिश्ते में नफ़ा-नुकसान देखा जाए..दिल के कुछ कनेक्शन ऐसे भी होते हैं जिनकी खुशबू ही काफी है..ताउम्र महकने के लिए.. +anshupriya prasad

मस्ती की पाठशाला

नया-नया स्कूल..नए-नए दोस्त..

इंतज़ार

इतनी रात हो गई..पापा, अब तो आ जाओ..

पा लो उसे जो हमारे लिए है बना

क्या हमारी ज़िंदगी में सब कुछ पहले से तय है..हम कुछ नहीं कर सकते...अगर ऐसा होता तो हमें अपना रास्ता चुनने की आज़ादी नहीं होती...किसी भी हालात में हम कैसे रियेक्ट करें, ये हमारे ऊपर है...हम किसी भी चीज को इतना खराब कर सकते हैं कि कोई उम्मीद ही ना रहे और इतना अच्छा भी कर सकते हैं कि मंज़िल साफ-साफ दिखाई देने लगे...हर इंसान में इतनी ताकत है कि वो अपना भाग्य खुद बना सके...वैसे भी इस बात की क्या गारंटी है कि किस्मत खराब भी होती है...कोई आकाशवाणी तो हुई नहीं आज तक...दो-चार बार हार का मुंह क्या देख लिया खुद से, खुदाई से खफ़ा हो गए...जब हर समय बुझे-बुझे रहोगे...कोशिश ही नहीं करोगे...तो आगे कैसे बढ़़ोगे...ज़मीन में ऐसे उगो कि तूफान भी हिला नहीं सके...क्योंकि असफलता मिलती ही इसलिए है कि उन चीज़ों को पाने का मज़ा बढ़ जाए जो उम्मीद से भी ज्यादा खूबसूरत हैं...इसलिए रुकना नहीं...अपने दमखम से वो हासिल करो जिस पर हमारा नाम उसी दिन लिख दिया गया था जिस दिन हमने उन्हें पाने का ख्वाब देखा था... +anshupriya prasad

अग्नि परीक्षा कितनी बार?

ज़िंदगी भी बड़ी अजीब है..जो चाहिए वो मिलता नहीं और जो नहीं चाहिए वो भर-भर कर मिलता रहता है..कभी-कभी तो हम छोटी से छोटी चीज़ के लिए भी ऐसे तरस जाते हैं जैसे कि उसे पाना फ़लक से चांद-तारे तोड़ने के बराबर हो..बार-बार ऐसा होने पर निराश मन ये सोचने पर मजबूर हो जाता है कि ऐसी चीज़ें तो दूसरों को बिना मांगे ही मिल जाती हैं फिर हमें क्यों हर बार अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ता है..क्या हमारे नसीब में इतनी छोटी सी चीज़ भी नहीं है..ऐसा नहीं है..अगर हमारा आज ख़राब है तब भी हमें कल के अच्छे होने की उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए..क्योंकि जब हम रोजमर्रा की परेशानियों में उलझे रह जाते हैं तो जीवन की हर खुशी पीछे छूटने लगती है..इसलिए हर चीज़ पर झुंझलाने, परेशान या दुखी होने की ज़रूरत नहीं है..कुछ चीज़ें समय के साथ अपने आप ठीक हो जाती हैं..और जो नहीं होती हैं उनको ठीक करने के लिए हमारा हौसला और उम्मीद ही काफ़ी है.. +anshupriya prasad