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जब जान ही नहीं रहेगी तो क्या करेंगे इनका?

नहीं चाहिए आपका ज्ञान, आपकी नफरत, आपकी मौका परस्ती..जब जान ही नहीं रहेगी तो क्या करेंगे इनका?

ये जो मुर्झाए हुए, डरे-सहमे चेहरें हैं..इन्हे ज़रूरत है थोड़ी सी करुणा, सहयोग और हौसला बढ़ाने वाले चार शब्दों की..

हमें क्या मिला? क्या नहीं? ये सोचने का समय, चला गया है..अब हमें ये सोचना है कि हम अपने समाज, अपने देश और दुनिया के लिए क्या कर सकते हैं?

लेकिन, अगर आप दूसरों की मदद नहीं कर सकते, तो भी कोई बात नहीं..आपका अच्छा सोचना और बोलना ही काफी है..

कोरोना के खिलाफ ये लड़ाई लंबी है..सावधानी बरतिए और एक दूसरे का हौसला बढ़ाते रहिए..

'कल' बदलना है तो पहले 'आज' बदलो..

दुख आने पर..परेशानियां होने पर..हमें जो काम, बिल्कुल नहीं करना चाहिए..हम वही, सबसे ज्यादा करते हैं..दुख में ना तो आंसू बहाने हैं और ना ही किसी को कोसना है..गुस्सा भी नहीं करना है और ना ही कुढ़-कुढ़ (Sulk) कर अपना खून जलाना है..'आज' को हम जितना ज्यादा बिगाड़ेंगे, 'कल' उतना ही ख़राब होता चला जाएगा..इसकी वजह ये है कि निराश होने से, गुस्सा करने से या गलत (Negative) सोचने और करने से, हमारा सारा समय और ताकत (Energy), इन्ही चीज़ों में खत्म हो जाती है..फिर, हम बेहतर चीज़ों पर ध्यान नहीं लगा पाते..और मुसीबतें बढ़ती ही चली जाती हैं..इसलिए, हालात चाहें जैसे हों, हमें अपनी ताकत को खोना नहीं है..बल्कि इसे तो और बढ़ाना है-अपनी तरक्की के लिए, अपनों की देखभाल के लिए और सेहतमंद रहने के लिए..ये पल जिसमें हम सांस ले रहे हैं, यही सबसे सही समय है, भविष्य (Future) संवारने के लिए ..इसलिए भटकना नहीं..सारा ध्यान लगाकर, कोशिश करते रहना..जो 'आज' मिल रहा है वो 'बीते हुए 'कल' की देन है..लेकिन इस पल यानी कि 'आज', हम जो भी सोचते, बोलते और करते हैं..उसकी सौगात हमें 'आ…